भाग 6 · राज्य
अनुच्छेद 190 स्थानों का रिक्त होना— (1) कोई व्यक्ति राज्य के विधान-मंडल के दोनों
- सदनों का सदस्य नहीं होगा और जो व्यक्ति दोनों सदनों का सदस्य चन लिया जाता है उसके एक या दूसरे द सदन के स्थान को रिक्त करने के लिए उस राज्य का विधान-मंडल विधि दूवारा उपबंध करे गा ।
- (2) कोई व्यक्ति पहली अनुसूची में विनिर्दिष्ट दो या अधिक राज्यों के विधान- मंडत्रों का सदस्य नहीं होगा और यदि कोई व्यक्ति दो या अधिक ऐसे राज्यों के विधान- मंडत्रों का सदस्य चन लिया जाता है तो ऐसी अवधि की समाप्ति के पश्चात ् जो राष्ट्रपति दूवारा बनाए गए नियमों.! में विनिर्दिष्ट की जाए, ऐसे सभी राज्यों के विधान- मंडत्रों अनुच्छेद वर्णित निरहता में ऐसे व्यक्ति का स्थान रिक्त हो जाएगा यदि उसने एक राज्य को छोड़कर शु(ख) यथास्थिति, अध्यक्ष हस्ताक्षर अन्य राज्यों के विधान-मंडलों में अपने स्थान को पहले ही नहीं त्याग दिया है ।
- (3) यदि राज्य के विधान-मंडलर के किसी सदन का सदस्य— यथास्थिति, अध्यक्ष (क) अनच् छे द 191 के खंड (2) मैं किसी से ग्रस्त हो जाता है; या निर्दिष्ट 3 यथास्थिति, अध्यक्ष (ख) या सभापति को संबोधित अपने सहित लेख दूवारा अपने स्थान का त्याग कर देता ता है और उसका त्यागपत्र, या सभापति दूवारा स्वीकार कर लिया जाता है, तो ऐसा होने पर उसका स्थान रिक्त हो जाएगा: “परंतु तु उपखंड (ख) में त्यागपत्र की दशा में, यदि प्राप्त जानकारी से या अनुज्ञा अन्यथा और ऐसी जांच करने के पश्चात ्, जो वह ठीक समझे, या सभापति का यह समाधान हो जाता है कि ऐसा त्यागपत्र स्वैच्छिक या असली नहीं है तो निरंतर वह ऐसे त्यागपत्र को स्वीकार नहीं करेगा गा ।
- (4) यदि किसी राज्य के विधान-मंडल के किसी सदन का सदस्य साठ दिन की अवधि तक सदन की के बिना उसके सभी अधिवेशनों से अनुपस्थित रहता है तो देखिए विधि सदन उसके स्थान को रिक्त घोषित कर सकेगा: परंतु तु साठ दिन की उक्त अवधि की संगणना करने में किसी ऐसी अवधि को हिसाब में नहीं लिया जाएगा जिसके दौरान सदन सत्रावसित या तर चार से अधिक संविधान दिनों के लिए स्थगित रहता है । संविधान (तैंतीसवां असाधारण, पृ० 678 में प्रकाशित समसामयिक सदस्यता प्रतिषेध नियम, 1950 । स्थान पर प्रतिस्थापित । । निरहताएं--
इसका अर्थ
ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।
यह अनुच्छेद राज्य विधान-मंडलों में सीट खोने के नियम रखता है। कोई व्यक्ति एक ही राज्य के विधान-मंडल के दोनों सदनों का सदस्य नहीं रह सकता। दो या अधिक राज्यों के विधान-मंडलों में एक साथ नहीं बैठ सकता। अयोग्यता, अध्यक्ष को लिखित इस्तीफे, या बिना अनुमति साठ दिन की अनुपस्थिति पर सीट खाली हो जाती है। सदन के सत्रावसान की अवधि इन साठ दिनों में नहीं गिनी जाती।