भाग 6 · राज्य
अनुच्छेद 227 सभी न्यायालयों के की उच्च न्यायालय की शक्ति
- (1) प्रत्येक अधीक्षण उच्च न्यायालय उन में सर्वत्र, जिनके संबंध में वह अपनी अधिकारिता का राज्यक्षेत्रों प्रयोग करता है, सभी न्यायालयों और अधिकरणों का करेगा भ. अधीक्षण और खंड (6) के स्थान पर प्रतिस्थापित । । संविधान (चवाल्लीसवां 2. संशोधन) अधिनियम, 1978 की धारा 30 द्वारा (1-8-1979 से), खंड (7) को खंड (4) के रूप में पुनःसंख्यांकित किया गया । संविधान (चवालीसवां 4. संशोधन) अधिनियम, 1976 की धारा 40 द्वारा (1-2-1977 से) खंड (1) के स्थान पर प्रतिस्थापित और तत्पश्चात ् संशोधन) अधिनियम, 1978 की धारा 31 द्वारा (20-6-1979 से) खंड (1) के स्थान पर प्रतिस्थापित । । संविधान (बयाल्लीसवां संविधान (बयाललीसवां संविधान (चवालीसवां (2) पूर्वगामी उपबंध की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, उच्च न्यायालय—
- (क) ऐसे न्यायालयों से विवरणी मंगा सकेगा
- (ख) ऐसे न्यायालयों की पद्धति और कार्यवाहियों के विनियमन के लिए साधारण नियम और प्ररूप बना सकेगा, और निकाल सकेगा तथा विहित कर सकेगा; और
- (ग) किन््हीं ऐसे न्यायालयों के अधिकारियों दूवारा रखी जाने वाली पुस्तकों, प्रविष्टियों और लेखाओं के प्ररूप विहित कर सकेगा ।
- (3) उच्च न्यायालय उन फीसों की सारणियां भी स्थिर कर सकेगा जो ऐसे न्यायालयों के शैरिफ को तथा सभी लिपिकों और अधिकारियों को तथा उनमें विधि- व्यवसाय करने वाले अटर्नियों, अधिवक्ताओं और प्लीडरों को अनज्ञेय होंगी: परंत तु खंड (2) या खंड (3) के अधीन बनाए गए कोई नियम, विहित किए गए कोई प्ररूप या स्थिर की गई कोई सारणी लत्समय प्रव के उपबंध से किसी विधि असंगत नहीं होगी और इनके लिए राज्यपाल के पूर्व अनुमोदन होगी । की अपेक्षा (4) इस अनुच्छेद की कोई बात उच्च न्यायालय को सशस्त्र बलों से संबंधित किसी विधि द्वारा या उसके अधीन गठित किसी न्यायालय या अधिकरण पर की शक्तियां देने ने समझी जाएगी । अधीक्षण कछ वाली नहीं 80(5)* * * *
इसका अर्थ
ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।
यह अनुच्छेद हर उच्च न्यायालय को अपने क्षेत्र की सारी अदालतों और न्यायाधिकरणों पर अधीक्षण देता है। उच्च न्यायालय रिटर्न मंगवा सकता है, नियम बना सकता है, प्रपत्र बता सकता है। वह मुकदमे स्थानांतरित कर सकता है और निचली अदालतों की फीस तय कर सकता है। यह अधीक्षण सैन्य अदालतों पर नहीं है।