भाग 6 · राज्य
अनुच्छेद 162 राज्य की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार
- इस संविधान के उपबंधों के अधीन रहते हुए किसी राज्य की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार उन विषयों पर होगा जिनके संबंध में उस राज्य के विधान-मंडल को विधि बनाने की शक्ति है: परंत तु के संबंध में राज्य के विधान-मंडल और संसद् को विधि बनाने की शक्ति है उसमें राज्य की कार्यपालिका शक्ति इस संविधान दूवारा या संसद् दूवारा जिस विषय बनाई गई किसी विधि दूवारा, संघ या उसके प्राधिकारियों को अभिव्यक्त रूप से कार्यपालिका शक्ति के अधीन और उससे परिसीमित होगी । प्रदत्त
इसका अर्थ
ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।
यह अनुच्छेद राज्य की कार्यपालिका शक्ति की सीमा बताता है। यह उन विषयों तक फैली है जिन पर राज्य विधान-मंडल कानून बना सकता है। जिन विषयों पर राज्य और संघ दोनों कानून बना सकते हैं, वहां राज्य की शक्ति संघ की शक्ति के अधीन है। यह अनुच्छेद राज्य प्रशासन की बाहरी रेखा खींचता है।