भाग 6 · राज्य
अनुच्छेद 172 रा य के विधान-मंडलों की अवधि
- ध—
- (1) येक रा य क येक वधान सभा, यदि द पहले ही वघ टत नह ं कर दी जाती है तो, अपने थम अ धवे शन के लिए राज्यों प्रत्येक राज्य की प्रत्येक विधान नियत तारीख ख से पांच वर्ष तक बनी रहेगी, गी, इससे अ धक नह ं और पांच वर्ष की विघटित नहीं प्रथम अधिवेशन उ त की ध क त का प रणाम वधान सभा का विघटन होगा: अधिक नहीं परंतु तु उ त अव ध को, जब आपात की क उ घोषणा वतन म है, तब संस विधि उक्त अवधि समाप्ति परिणाम विधान दूवारा, ऐसी अवधि ध के लिए बढ़ा सकेगी, जो एक बार में एक वर्ष से अ धक नह ं होगी और उ घोषणा के वतन में न रह जाने के प चात ् कसी भी दशा में उसका व तार उक्त अवधि उदूघोषणा प्रवर्तन में छह मास की अवधि ध से अ धक नह ं होगा । अधिक नहीं (2) की य क वधान प रष का विघटन नहीं ं होगा, कं तु उसके सद में म से उदूघोषणा प्रवर्तन पश्चात् किसी विस्तार यथासंभव निकटतम एक- तहाई सद य संस द्वारा व ध वारा इस न म त बनाए गए अधिक नहीं उपबंधों के अनु सार, येक की वष क त पर यथाश य शी नवृ त हो जाएंगे । राज्य विधान परिषद् किंतु सदस्यों
इसका अर्थ
ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।
यह अनुच्छेद राज्य विधान-मंडलों की अवधि तय करता है। हर विधान सभा पांच वर्ष चलती है, जब तक पहले भंग न हो। विधान परिषद भंग नहीं होती। हर दूसरे वर्ष उसके लगभग एक-तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त होते हैं। आपातकाल लागू रहते संसद कानून से सभा की अवधि बढ़ा सकती है, एक बार में एक वर्ष।