भाग 6 · राज्य
अनुच्छेद 228 कुछ का उच्च न्यायालय को अंतरण— यदि उच्च न्यायालय का यह
- (६८ के न न न समाधान हो जाता है कि उसके अधीनस्थ किसी न्यायालय मैं लंबित किसी मामले में इस संविधान के निर्वचन के बारे में विधि का कोई सारवान ् प्रश्न है जिसका मामलों अवधारण मामले के निपटारे के लिए आवश्यक है थृतो वह 3***उस मामले को अपने पास मंगा लेगा और— अंतर्वलित (क) मामले को स्वयं निपटा सकेगा; या (ख) उक्त विधि के प्रश्न का अवधारण कर सकेगा और उस मामले को ऐसे प्रश्न पर निर्णय की सहित उस न्यायालय को, जिससे मामला इस प्रकार मंगा लिया गया है, लॉटा सकेगा और उक्त न्यायालय उसके प्राप्त होने पर उस मामले को ऐसे निर्णय के अनुरूप निपटाने के लिए आगे करे भ. । प्रतिलिपि कार्यवाही किया गया और संविधान संशोधन) अधिनियम, 1978 की धारा 31 द्वारा (20-6-1979 से) उसका लोप किया गया । अपने पास मंगा लेगा तथा--” के स्थान पर प्रतिस्थापित । । संविधान (बयालीसवां 3. संशोधन) अधिनियम, 1977 की धारा 9 द्वारा (13-4-1978 से) “अनुच्छेद द 131क के उपबंधों (चवाल्लीसवां के अधीन रहते हुए” शब्दों, अंकों और का लोप किया गया । संविधान (बयात्लीसवां संविधान (तैंतालीसवां अक्षर 1 विधियों
इसका अर्थ
ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।
यह अनुच्छेद उच्च न्यायालय को मुकदमा ऊपर खींचने देता है। निचली अदालत के मुकदमे में संविधान की व्याख्या का कोई वस्तुतः महत्वपूर्ण प्रश्न हो, तो उच्च न्यायालय उसे अपने पास बुलाकर खुद तय कर सकता है। वह मुकदमे का बाकी हिस्सा खुद देख सकता है या वापस भेज सकता है।