भाग 6 · राज्य

अनुच्छेद 169 का उत्सादन या स (1) अनुच्छे द 168 जिसमें

  1. बात के होते हुए भी, संसद् विधि द्वारा किसी विधान परिषद् वाले राज्य में सृजन विधान परिषद् के उत्सादन के लिए या ऐसे राज्य में, विधान परिषद् नहीं है, विधान परिषद् के स के लिए उपबंध कर सकेगी, यदि उस राज्य की विधान सभा ने इस आशय का संकल्प विधान सभा की कल सदस्य संख्या के बहमत द्वारा तथा उपस्थित और मत देने ने वाले सदस्यों की संख्या के कम से कम दो-तिहाई बहुमत द्वारा पारित कर दिया है । विनिर्दिष्ट (2) खंड (1) में किसी विधि में इस संविधान के संशोधन के लिए ऐसे अंतर्विष्ट उपबंध होंगे जो उस विधि के उपबंधों को प्रभावी करने के लिए आवश्यक हों तथा अंतर्विष्ट जिन्हें ऐसे अनुपूरक, आनुष॑गिक और पारिणामिक उपबंध भी हो सकेंगे संसद् आवश्यक समझे । पूर्वोक्त (3) प्रकार की कोई विधि अनुच्छेद द 368 के प्रयोजनों के लिए इस संविधान का संशोधन नहीं समझी जाएगी । विधान

इसका अर्थ

ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।

यह अनुच्छेद राज्य को अपने विधान-मंडल का स्वरूप बदलने देता है। संसद कानून से किसी राज्य की विधान परिषद खत्म कर सकती है। जिस राज्य में परिषद नहीं, वहां बना सकती है। इससे पहले राज्य की सभा को विशेष बहुमत से प्रस्ताव पारित करना होता है। ऐसा कानून अनुच्छेद 368 के तहत संविधान संशोधन नहीं माना जाता।

Article 169 in English