भाग 6 · राज्य
अनुच्छेद 191 सदस्यता के लिए (1) कोई व्यक्ति किसी राज्य की विधान निरर्हित
- सभा या विधान परिषद् का सदस्य चुने जाने के लिए और सदस्य होने के लिए होगा— 1 विनिर्दिष्ट (क) यदि वह भारत सरकार के या पहली अनसूची मैं किसी राज्य की सरकार के अधीन, ऐसे पद को छोड़कर जिसको धारण करने वाले का निरहित न होना राज्य के विधान-मंडल ने विधि दूवारा घोषित किया है, कोई लाभ का पद धारण करता है;
- (ख) यदि वह विकृतचित्त है और सक्षम न्यायालय की ऐसी घोषणा विद्यमान है
- (ग) यदि वह अननन््मोचित दिवालिया है
- (घ) यदि वह भारत का नागरिक नहीं है या उसने किसी विदेशी राज्य की नागरिकता स्वेच्छा से अिजर्त कर ली है या वह किसी विदेशी राज्य के प्रति निष्ठा या अनुशिक्त को अभिस्वीकार किए हए है; अर्जित (ड) यदि वह संसद् दूवारा बनाई गई किसी विधि द्वारा या उसके अधीन अनशक्ति इस प्रकार कर दिया जाता है । इस खंड के प्रयोजनों के कोई व्यक्ति केवल इस कारण निरहिंत भारत सरकार के या पहली अनसूची में किसी राज्य की सरकार के अधीन लाभ का पद धारण करने वाला नहीं समझा जाएगा कि वह संघ का या ऐसे राज्य का स्पष्टीकरण-- ल्रिए, मंत्री है । विनिर्दिष्ट (2) कोई व्यक्ति किसी राज्य की विधान सभा या विधान परिषद् का सदस्य होने के लिए होगा यदि वह दसवीं अनसूची के अधीन इस प्रकार हो जाता है ।
इसका अर्थ
ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।
यह अनुच्छेद राज्य विधान-मंडल की सदस्यता की अयोग्यताएं गिनाता है। भारत सरकार या किसी राज्य के अधीन लाभ का पद रखने वाला अयोग्य है, जब तक कानून उस पद को छूट न दे। मंत्री यहां लाभ का पद नहीं माने जाते। अदालत के घोषित मनोविक्षिप्त, अदावती दिवालिया या स्वेच्छा से दूसरे देश का नागरिक बना व्यक्ति अयोग्य है। संसद कानून से और आधार जोड़ सकती है। दसवीं अनुसूची दल-बदल पर अयोग्यता जोड़ती है।