भाग 6 · राज्य

अनुच्छेद 200 पर अनुमति

  1. जब कोई विधेयक राज्य की विधान सभा द्वारा या विधान परिषद् वाले राज्य में विधान-मंडल के दोनों सदनों द्वारा पारित कर दिया समक्ष गया है तब वह राज्यपाल के प्रस्तुत किया जाएगा और राज्यपाल घोषित करेगा कि देता वह विधेयक पर अनुमति दे ता है या अनुमति रोक लेता है अथवा वह विधेयक को आरक्षित राष्ट्रपति के विचार के लिए रखता है: परंतु तु राज्यपाल अनुमति के लिए अपने समक्ष विधेयक प्रस्तुत किए जाने के पश्चात ् यथाशीघ्र उस विधेयक को, यदि वह धन विधेयक नहीं है तो, सदन या सदनों को इस संदेश के साथ लौटा सकेगा कि सदन या दोनों सदन विधेयक पर या उसके किन्हीं विनिर्दिष्ट उपबंधों ष्ट पर पुनर्विचार करें और विशिष्टतया किन्हीं ऐसे संशोधनों के पुरमस्थापन की वांछनीयता पर विचार करें जिनकी उसने अपने संदेश में सिफारिश की है और जब विधेयक इस प्रकार लौटा दिया जाता है तब सदन या दोनों सदन विधेयक पर तदनुसार पुनर्विचार करेंगे गे और यदि विधेयक सदन या सदनों दूवारा संशोधन सहित या उसके बिना फिर से पारित कर दिया जाता है और राज्यपाल के समक्ष अनुमति के लिए प्रस्तुत किया जाता है तो राज्यपाल उस पर अनुमति नहीं रोकेगा: परंत तु यह और कि जिस विधेयक से, उसके विधि बन जाने पर, राज्यपाल की राय में उच्च न्यायालय की का ऐसा अल्पीकरण होगा कि वह स्थान, शक्तियों जिसकी पूर्ति के लिए वह न्यायालय इस संविधान द्वारा है, संकटापन्न हो जाएगा, उस परिकल्पित विधेयक पर राज्यपाल अनुमति नहीं देगा, गा, तु उसे राष्ट्रपति के विचार के लिए किंत आरक्षित रखेगा ।

इसका अर्थ

ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।

यह अनुच्छेद राज्यपाल की अनुमति से जुड़ा है। सदनों के पारित करने पर विधेयक राज्यपाल के सामने आता है। राज्यपाल अनुमति दे सकते हैं, रोक सकते हैं, या पुनर्विचार के लिए लौटा सकते हैं। विधान-मंडल उसे फिर पारित करे, तो राज्यपाल को अनुमति देनी होगी। राज्यपाल विधेयक राष्ट्रपति के विचार के लिए भी रोक सकते हैं। यह रोक बड़े प्रश्नों से जुड़े विधेयकों के लिए होती है।

Article 200 in English