भाग 6 · राज्य
अनुच्छेद 182 का सभापति और उपसभापति
- विधान परिषद् वाले प्रत्येक राज्य की विधान परिषद्, यथाशीघ्र, अपने दो सदस्यों को अपना सभापति और विधान परिषद् उपसभापति चुनेगी और जब-जब सभापति या उपसभापति का पद रिक्त होता है तब-तब परिषद् किसी अन्य सदस्य को, सभापति या उपसभापति चन । यथास्थिति, चुनेगी ।
इसका अर्थ
ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।
यह अनुच्छेद विधान परिषद के पदाधिकारी देता है। जिस राज्य की परिषद है, उसकी परिषद अपने ही सदस्यों में से दो को सभापति और उपसभापति चुनती है। यह चुनाव जितनी जल्दी हो सके होता है। कोई भी पद खाली होने पर परिषद कोई दूसरा सदस्य चुनती है।