भाग 6 · राज्य
अनुच्छेद 198 धन विधेयकों के संबंध में विशेष प्रक्रिया
- (1) धन विधेयक विधान परिषद् में पुरःस्थापित नहीं किया जाएगा ।
- (2) धन विधेयक विधान परिषद् वाले राज्य की विधान सभा दूवारा पारित किए विधान परिषद् सिफारिशों पारेषित किया जाने के पश्चात ् को उसकी के लिए पारे जाएगा और विधान परिषद् विधेयक की प्राप्ति की तारीख से चौदह दिन की अवधि के भीतर विधेयक सिफारिशों को अपनी सहित विधान सभा को लौटा देगी गी और ऐसा होने पर विधान सभा, सिफारिशों विधान परिषद् की सभी या किन्हीं को स्वीकार या अस्वीकार कर सकेगी । यदि विधान (3) सभा, विधान परिषद् की किसी सिफारिश को स्वीकार कर लेती है तो धन विधेयक विधान परिषद् दूवारा सिफारिश किए गए और विधान सभा द्वारा स्वीकार किए गए संशोधनों सहित दोनों सदनों द्वारा पारित किया गया समझा जाएगा । यदि विधान (4) सभा, विधान परिषद् की किसी भी सिफारिश को स्वीकार नहीं करती है तो धन विधेयक विधान परिषद् द्वारा सिफारिश किए गए किसी संशोधन के जिसमें बिना, दोनों सदनों दूवारा उस रूप में पारित किया गया समझा जाएगा वह विधान सभा दूवारा पारित किया गया था । यदि (5) विधान सभा द्वारा पारित और विधान परिषद् को उसकी सिफारिशों के लिए पारेषित पारे धन विधेयक उक्त चौदह दिन की अवधि के भीतर विधान सभा को नहीं लौटाया जाता है तो उक्त अवधि की समाप्ति पर वह दोनों सदनों दूवारा उस रूप में पारित किया गया समझा जाएगा जिसमें वह विधान सभा दूवारा पारित किया गया था ।
इसका अर्थ
ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।
यह अनुच्छेद राज्य के धन विधेयकों पर सभा को एकछत्र नियंत्रण देता है। धन विधेयक विधान परिषद में पेश नहीं हो सकता। सभा के पारित करने पर परिषद के पास चौदह दिन हैं। परिषद उसे सिफारिशों के साथ लौटाती है। सभा सिफारिशें मान या अमान सकती है। परिषद चौदह दिन में विधेयक न लौटाए, तो वह दोनों सदनों द्वारा पारित मान लिया जाता है।