भाग 6 · राज्य
अनुच्छेद 225 व यमान उ की यायालय क अ धका रता— इस सं वधान के उपबंधों के संविधान द्वारा समुचित विधान-मंडल प्रदत्त शक्तियों
- अधीन रहते हुए ए और इस सं वधान वारा समु चत वधान-मंडल को द त शि तय के विधि आधार पर उस विधान-मंडल दूवारा बनाई गई किसी व ध के उपबंधों के अधीन रहते किसी विद्यमान उच्च न्यायालय अधिकारिता प्रशासित विधि हुए ए, कसी व यमान की च यायालय क अ धका रता और उसमें शा सत व ध तथा प्रशासन न्यायाधीशों उस न्यायालय में न्याय शासन के संबंध में उसके यायाधीश की अपनी-अपनी शक्तियां, जिनके अंतर्गत न्यायालय शक्ति शि तयां, अंतगत यायालय के नियम बनाने की शि त तथा उस न्यायालय और सदस्यों बैठकों न्यायालयों में बैठें विनियमन उसके सद की क बैठक का चाहे वे अकेले बैठें या खंड ड यायालय म बैठ व नयमन शक्ति होंगी संविधान प्रारंभ करने की शि त है, वही ह गी जो इस सं वधान के भ से ठीक क पहले थीं: परंतु 1 राजस्व संग्रहण आदिष्ट परं तु राज व संबंधी अथवा उसका सं हण करने में आ द ट या किए गए किसी उच्च न्यायालयों में आरंभिक अधिकारिता कार्य संबंधी विषय की बाबत उ च यायालय म से किसी की आरं भक अ धका रता का प्रयोग, संविधान प्रारंभ निर्बधन योग, इस सं वधान के भ से ठीक क पहले, जिस किसी नबधन के अधीन था वह निर्बंधन अधिकारिता प्रयोग प्रारंभ पश्चात् नबधन ऐसी अ धका रता के योग को ऐसे भ के प चात ् लागू नहीं ं होगा थू226. 2 उच्च न्यायालय की शक्ति अनुच्छेद
इसका अर्थ
ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।
यह अनुच्छेद पुराने अधिकार क्षेत्र को जीवित रखता है। संविधान से पहले उच्च न्यायालयों की जो शक्तियां थीं, वे बनी रहती हैं। वे तब तक चलती हैं जब तक कानून अन्यथा न करे। नया ढांचा पुरानी अदालतों पर खड़ा है। निरंतरता गणतंत्र के पहले दिन से चली।