भाग 6 · राज्य
अनुच्छेद 221 न्यायाधीशों के वेतन आदि
- (1) प्रत्येक उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को ऐसे वेतनों का संदाय किया जाएगा जो संसद, विधि द्वारा, अवधारित करे और जब भ. संविधान (पंद्रहवां संशोधन) अधिनियम, 1963 की धारा 4(ख) द्वारा (भूतलक्षी प्रभाव से) अंतःस्थापित । । संविधान शब्दों का लोप किया गया । प्रतिस्थापित । संविधान तक इस निमित्त इस प्रकार उपबंध नहीं किया जाता है तब तक ऐसे वेतनों का संदाय किया जाएगा जो दूसरी द अनुसूची में विनिर्दिष्ट हैं ।
- (2) प्रत्येक न्यायाधीश ऐसे का तथा अनुपस्थिति छुट्टी और पेंशन के संबंध भत्तों में ऐसे अधिकारों का, जो संसद् द्वारा बनाई गई विधि दवारा या उसके अधीन समय- समय पर अवधारित किए जाएं, और जब तक इस प्रकार अवधारित नहीं किए जाते हैं तब तक ऐसे और अधिकारों का, जो द अनुसूची में हैं, हकदार होगा: भत्तों दूसरी विनिर्दिष्ट परंतु तु न्यायाधीश के में और अनुपस्थिति छुट्टी या पैंशन के संबंध में उसके अधिकारों में उसकी के पश्चात ् उसके लिए अलाभकारी नहीं किया किसी भत्तों जाएगा । नियुक्ति परिवर्तन
इसका अर्थ
ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।
यह अनुच्छेद उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों का वेतन देता है। संसद कानून से तय करती है, और कानून बनने तक दूसरी अनुसूची तय करती है। नियुक्ति के बाद वेतन न्यायाधीश के हानिकारक रूप से नहीं काटा जा सकता। यह सुरक्षा न्यायाधीश को बिना डरे काम करने देती है।