भाग 6 · राज्य

अनुच्छेद 181 जब अध्यक्ष या उपाध्यक्ष को पद से हटाने का कोई संकल्प विचाराधीन है

  1. तब उसका पीठासीन न होना— विधान (1) सभा की किसी बैठक में, जब अध्यक्ष को उसके पद से हटाने का कोई संकल्प विचाराधीन है तब अध्यक्ष, या जब उपाध्यक्ष को उसके पद से हटाने का कोई संकल्प विचाराधीन है तब उपाध्यक्ष, उपस्थित रहने पर भी, पीठासीन नहीं होगा और अनुच्छेद द 180 के खंड (2) के उपबंध ऐसी प्रत्येक बैठक के संबंध में वैसे ही लागू होंगे जैसे वह उस बैठक के संबंध में लागू होते हैं जिससे, यथास्थिति अध्यक्ष या उपाध्यक्ष अनुपस्थित है ।
  2. (2) जब को उसके पद से हटाने का कोई संकल्प विधान सभा में अध्यक्ष विचाराधीन है तब उसको विधान सभा में बोलने और उसकी में अन्यथा भाग कार्यवाहियों लेने का अधिकार होगा और वह अनुच्छेद द 189 में किसी बात के होते हुए भी, ऐसे संकल्प पर या ऐसी के दौरान किसी अन्य विषय पर प्रथमत: ही मत देने ने का कार्यवाहियों हकदार होगा तु मत बराबर होने की दशा में मत देने ने का हकदार नहीं होगा । किंतु

इसका अर्थ

ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।

यह अनुच्छेद अध्यक्ष की हटाने की प्रक्रिया को निष्पक्ष रखता है। अध्यक्ष को हटाने का प्रस्ताव विचाराधीन हो, तो अध्यक्ष अध्यक्षता नहीं करता। यही नियम उपाध्यक्ष पर है। अध्यक्ष बोल सकता है और कार्यवाही में भाग ले सकता है। ऐसी कार्यवाही में वह केवल मत बराबरी की स्थिति में मत देता है।

Article 181 in English