भाग 6 · राज्य
अनुच्छेद 163 राज्यपाल को सहायता और सलाह देने ने के लिए मंत्रि-परिषद्
- (1) इस संविधान द्वारा या इसके अधीन राज्यपाल से यह है कि वह अपने कृत्यों मंत्रि-परिष्द या उनमें से किसी को अपने विवेकानुसार करे, उन बातों को छोड़कर राज्यपाल को अपने कृत्यों का प्रयोग करने में सहायता और सलाह देने ने के लिए एक मंत्रे-परिषद् होगी जिसका जिन बातों प्रधान, मुख्यमंत्री होगा । में अपेक्षित (2) कोई प्रश्न उठता है कि कोई विषय ऐसा है या नहीं जिसके संबंध में इस संविधान दूवारा या इसके अधीन राज्यपाल से यह है कि वह अपने विवेकानसार कार्य करे तो राज्यपाल का अपने विवेकानसार किया गया विनिश्चय अंतिम होगा और राज्यपाल दूवारा की गई किसी बात की विधिमान्यता इस आधार पर प्रश्नगत नहीं की जाएगी कि उसे अपने विवेकानुसार कार्य करना चाहिए था या नहीं । । यदि (3) इस प्रश्न की किसी न्यायालय में जांच नहीं की जाएगी कि क्या मंत्रियों ने अपेक्षित राज्यपाल को कोई सलाह दी, और यदि दी तो क्या दी । ।
इसका अर्थ
ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।
यह अनुच्छेद राज्य की मंत्रिपरिषद बनाता है। मुख्य मंत्री की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद राज्यपाल को सलाह और सहायता दे। राज्यपाल सलाह पर काम करता है, सिवाय जहां संविधान उसे विवेक से कार्य करना कहे। कोई मामला विवेकाधीन है या नहीं, यह राज्यपान तय करता है, और उसका निर्णय अंतिम है। दी गई सलाह पर अदालतें पूछतीछाल नहीं कर सकतीं।