भाग 6 · राज्य
अनुच्छेद 229 उच्च न्यायालयों के अधिकारी और सेवक तथा व्यय— किसी (1) उच्च
- न्यायालय के अधिकारियों और सेवकों की नियुक्तियां उस न्यायालय का मुख्य न्यायमूर्ति करेगा गा या उस न्यायालय का ऐसा अन्य न्यायाधीश या अधिकारी करेगा जिसे गा वह निदिष्ट करे: परंतु तु उस राज्य का राज्यपाल 2*** नियम दूवारा यह कर सकेगा कि ऐसी अपेक्षा किन्हीं द्शाओं में जो नियम में की जाएं, किसी ऐसे व्यक्ति को, जो पहले से विनिर्दिष्ट ही न्यायालय से संलग्न नहीं है, न्यायालय से संबंधित किसी पद पर राज्य लोक सेवा आयोग से परामर्श करके ही नियुक्त किया जाएगा, अन्यथा नहीं । ।
- (2) राज्य के विधान-मंडल दूवारा बनाई गई विधि के उपबंधों के अधीन रहते हुए, उच्च न्यायालय के और सेवकों की सेवा की ऐसी होंगी जो उस न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति या उस न्यायालय के ऐसे अन्य न्यायाधीश या अधिकारी अधिकारियों शर्तें दूवारा, जिसे मुख्य न्यायमूर्ति ने इस प्रयोजन के लिए नियम बनाने के लिए प्राधिकृत किया है, बनाए गए नियमों द्वारा विहित की जाएं: परंत तु इस खंड के अधीन बनाए गए नियमों के लिए, जहां तक वे वेतनों, छुट्टी या पैंशनों से संबंधित हैं, उस राज्य के राज्यपाल के 12*** अनुमोदन की होगी । भत्तों,
- (3) उच्च न्यायालय के प्रशासनिक व्यय, जिनके अंतर्गत उस न्यायालय के अपेक्षा और सेवकों को या उनके संबंध में संदेय सभी वेतन, और पेंशन हैं, राज्य की संचित निधि पर भारित होंगे और उस न्यायालय द्वारा ली गई फीसें और अन्य धनराशियां उस निधि का भाग होंगी । ।
इसका अर्थ
ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।
यह अनुच्छेद उच्च न्यायालय के कर्मचारियों और खर्चों से जुड़ा है। अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति मुख्य न्यायमूर्ति या उनके प्रतिनिधि न्यायाधीश करते हैं। अदालत का खर्च, वेतन और पेंशन समेत, राज्य की संचित निधि पर अधिरोपित होता है।