भाग 6 · राज्य
अनुच्छेद 212 द्वारा विधान-मंडत्र की कार्यवाहियों की जांच न किया जाना—
- (1) राज्य के विधान-मंडलर की किसी कार्यवाही की विधिमान्यता को प्रक्रिया की किसी अभिकथित अनियमितता के आधार पर प्रश्नगत नहीं किया जाएगा ।
- (2) राज्य के विधान-मंडलर का कोई अधिकारी या सदस्य, इस संविधान जिसमें द्वारा या इसके अधीन उस विधान-मंडल में प्रक्रिया या कार्य संचालन का विनियमन करने की अथवा व्यवस्था बनाए रखने की शक्तियां निहित हैं, उन के अपने शक्तियों दूवारा प्रयोग के विषय मैं किसी न्यायालय की अधिकारिता के अधीन नहीं होगा । अध्याय 4— राज्यपाल की विधायी शक्ति अध्याय
इसका अर्थ
ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।
यह अनुच्छेद राज्य विधान-मंडल की कार्यवाही को अदालतों से बचाता है। कार्यवाही की कथित अनियमितता के कारण कोई अदालत उस पर सवाल नहीं उठा सकती। कार्यवाही व्यवस्थित करने या अनुशासन रखने वाले पदाधिकारी भी अदालतों की पहुंच से बाहर हैं। प्रक्रियागत शिकायतें विधान-मंडल के भीतर की हैं। अदालतें यहां हट जाती हैं।