भाग 6 · राज्य
अनुच्छेद 170 सभाओं की संरचना— (1) अनुच्छेद द 333 के उपबंधों के अधीन
- रहते हुए, प्रत्येक राज्य की विधान सभा उस राज्य में प्रादेशिक प्रादे निर्वाचन+्षेत्रों से प्रत्यक्ष निर्वाचन दूवारा चने हए पांच सौ से अनधिक और साठ से अन्यून, सदस्यों से मिलकर बनेगी ।
- (2) खंड (1) के प्रयोजनों के लिए, प्रत्येक राज्य को प्रादे ऐसी रीति से किया जाएगा कि प्रत्येक की जनसंख्या का उसको प्रादेशिक निर्वाचन-क्षेत्रों मैं आबंटित स्थानों की संख्या से अनुपात समस्त राज्य में यथासाध्य एक ही हो । विभाजित निर्वाचन-क्षेत्र तमिलनाडु विधान परिषद् अधिनियम, "तमिलनाडु" शब्द अंतःस्थापित । । पर प्रतिस्थापित । । पुनर्गठन अधिनियम, 3. बंगाल विधान परिषद् (उत्सादन) अधिनियम, 1969 (1969 का 20) की धारा 4 दूवारा (1-8-1969 से) प्रदेश श और पश्चिमी बंगाल” के स्थान पर प्रतिस्थापित । । “उत्तर प्रतिस्थापित । संविधान भारत का संविधान रा पूर्ववर्ती 'स्पष्टीकरण--इस इस खंड में “जनसंख्या” पद से ऐसी अंतिम जनगणना में अभिनिश्चित की पूर्ववर्ती निर्देश गई जनसंख्या अभिप्रेत है जिसके ससंगत आंकड़े प्रकाशित हो गए हैं: परंत तु इस स्पष्टीकरण में अंतिम जनगणना के प्रति जिसके ससंगत आंकड़े प्रकाशित हो गए हैं, श का, जब तक सन ध 2026 2026 के पश्चात की गई पहली प्रतिनिर्देश जनगणना के सुसंगत आंकड़े प्रकाशित नहीं हो जाते हैं, यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह की जनगणना के श है । प्रादेशिक निर्वाचन-क्षेत्रों में विभाजन (3) प्रत्येक जनगणना की समाप्ति पर प्रत्येक राज्य की विधान सभा में स्थानों पनःसमायोजन किया की कल संख्या और प्रत्येक राज्य के प्रादे का ऐसे प्राधिकारी दूवारा और ऐसी रीति से पन ःसमायोजन जाएगा जो संसद विधि द्वारा अवधारित करे: परंत तु ऐसे पन: समायोजन से विधान सभा में प्रतिनिधित्व पद पर तब तक कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा जब तक उस समय विद्यमान विधान सभा का विघटन नहीं हो जाता है: परंत तु यह और कि ऐसा पुन: समायोजन उस तारीख से प्रभावी होगा जो राष्ट्रपति आदेश विनिर्दिष्ट 4 निर्वाचन प्रादेशिक निर्वोचन-क्षेत्रों आदे श द्वारा करे और ऐसे पन: समायोजन के प्रभावी होने तक विधान सभा के लिए कोई उन प्रादे के आधार पर हो सकेगा जो ऐसे पन: समायोजन के पहले विद्यमान हैं परंतु तु यह और भी कि जब तक सन थ2026 2026 के पश्चात की गई पहली जनगणना के ससंगत आंकड़े प्रकाशित नहीं हो जाते हैं तब तक शूइस खंड के अधीन,— (i) प्रत्येक राज्य की विधान सभा में 1971 की जनगणना के आधार पर पुन: समायोजित स्थानों की कुल संख्या का; और प्रादेशिक निर्वाचन-क्षेत्रों में विभाजन (ii) ऐसे राज्य के प्रादे का, जो 2001 की जनगणना के आधार पर पुन: समायोजित किए जाएं, पुन: समायोजन आवश्यक नहीं होगा भ. संविधान (बयालीसवां प्रतिस्थापित । संविधान 2. (चौरासीवां संशोधन) अधिनियम, 2001 की धारा 5 द्वारा (21-2-2002 से) “2000” के स्थान पर प्रतिस्थापित । संविधान प्रतिस्थापित । संविधान (चौरासीवां संशोधन) अधिनियम, 2001 की धारा 5 द्वारा (21-2-2002 से) मूल अंक "1971 के स्थान पर "1991"" अंक प्रतिस्थापित किए गए थे । संविधान (बयालीसवां प्रतिस्थापित । संविधान जि (जे (छा. दि
इसका अर्थ
ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।
यह अनुच्छेद विधान सभा का आकार तय करता है। हर सभा में अधिकतम पांच सौ और न्यूनतम साठ सदस्य होते हैं। वे राज्य के क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों से सीधे चुने जाते हैं। निर्वाचन क्षेत्र इस तरह बनते हैं कि जहां तक संभव हो, सीटों और आबादी का अनुपात एक जैसा रहे। आबादी का अर्थ अंतिम प्रकाशित जनगणना के आंकड़े हैं।