भाग 6 · राज्य
अनुच्छेद 194 विधान-मंडलों के सदनों की तथा उनके सदस्यों और की
- शक्तियां, विशेषाधिकार, आदि--
- (1) इस संविधान के उपबंधों के और विधान-मंडल की प्रक्रिया का विनियमन करने वाले नियमों और स्थायी आदेशों के अधीन रहते हुए, प्रत्येक वाक्-स्वातंत््य राज्य के विधान-मंडल में वाक् होगा ।
- (2) राज्य के विधान-मंडल में या उसकी किसी समिति में विधान-मंडल के किसी सदस्य दूवारा कही गई किसी बात या दिए गए किसी मत के संबंध मैं उसके विरुदूध किसी न्यायालय में कोई कार्यवाही नहीं की जाएगी और किसी व्यक्ति के विरुदूध ऐसे विधान-मंडल के किसी सदन के प्राधिकार दूवारा या उसके अधीन किसी प्रतिवेदन पत्र, मतों या कार्यवाहियों के प्रकाशन के संबंध में इस प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं की जाएगी ।
- (3) अन्य बातों में राज्य के विधान-मंडल के किसी सदन की और ऐसे विधान- मंडल के किसी सदन के सदस्यों और समितियों की शक्तियां, विशेषाधिकार और उन्मुक्तियां ऐसी होंगी जो वह विधान-मंडल, समय-समय पर, विधि द्वारा परिनिश्चित करे संविधान (बयालीसवां निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया गया:— समितियों "(3) अन्य बातों में किसी राज्य के विधान-मंडल के किसी सदन की और ऐसे विधान-मंडल के किसी सदन के सदस्यों और की शक्तियां, विशेषाधिकार और उन्मुक्तियां वे होंगी, जो संविधान (बयालीसवां संशोधन) समितियों अधिनियम, 1976 की धारा 34 के प्रारंभ भ पर थी और जो लोक सभा दूवारा ऐसे सदन और उसके सदस्यों और समितियों के लिए व्यक्त की जाएं, जहां ऐसा सदन विधान सभा है और राज्य सभा द्वारा ऐसे सदन और उसके सदस्यों और के लिए व्यक्त की जाएं, जहां ऐसा सदन विधान परिषद् है ।"। इस संशोधन का संविधान (चवालीसवां संशोधन) अधिनियम, 1978 की धारा 45 द्वारा (19-6-1979 से) लोप कर दिया गया । और जब तक वे इस प्रकार परिनिश्चित नहीं की जाती हैं तब तक वही होंगी जो संविधान प्रवृत्त (चवालीसवां संशोधन) अधिनियम, 1978 की धारा 26 के प्रव होने से ठीक पहले उस समितियों सदन की और उसके सदस्यों और की थीं ।
- (4) जिन व्यक्तियों को इस संविधान के आधार पर राज्य के विधान-मंडलर के किसी सदन या उसकी किसी समिति में बोलने का और उसकी कार्यवाहियों में अन्यथा भाग लेने का अधिकार है, उनके संबंध में खंड (1), खंड (2) और खंड (3) के उपबंध उसी प्रकार लागू होंगे जिस प्रकार वे उस विधान-मंडल के सदस्यों के संबंध में लागू होते हैं ।
इसका अर्थ
ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।
यह अनुच्छेद राज्य विधान-मंडलों में भाषण की स्वतंत्रता देता है। संविधान और कार्यवाही के नियमों के अधीन हर राज्य के विधान-मंडल में भाषण की स्वतंत्रता है। विधान-मंडल या उसकी समितियों में कही बात या दिए मत के लिए कोई सदस्य अदालत में उत्तरदायी नहीं। सदन के प्राधिकार से प्रकाशित सामग्री को वही सुरक्षा मिलती है। अन्य शक्तियां और विशेषाधिकार राज्य विधान-मंडल कानून से परिभाषित करता है।