भाग 6 · राज्य
अनुच्छेद 231 दो या अधिक राज्यों के लिए एक ही उच्च न्यायालय की स्थापना— (1)
- इस अध्याय के उपबंधों में किसी बात के होते हए भी, संसद, विधि द्वारा, दो या अधिक राज्यों के लिए अथवा दो या अधिक राज्यों और किसी संघ राज्यक्षेत्र के लिए पूर्ववर्ती एक ही उच्च न्यायालय स्थापित कर सकेगी ।
- (2) ऐसे उच्च न्यायालय के संबंध मैं,-- को) हज न न न * किसी (ख) अधीनस्थ न्यायालयों के लिए नियमों, प्ररूपों या सारणियों के संबंध में, अनुच्छेद द 227 में राज्यपाल के प्रति श का यह अर्थ लगाया जाएगा किरन्हीं कि वह उस राज्य के राज्यपाल के प्रति हैं वे अधीनस्थ न्यायालय निर्देश स्थित हैं; और निर्देश जिसमें (ग) अनच् छे द 219 और अनच् अनुच्छेद अनुच्छेद छे द 229 में राज्य के प्रति निर्देशों का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वे उस राज्य के प्रति निर्देश हैं, जिसमें उस उच्च न्यायालय का मुख्य स्थान है: परंतु यदि तु ऐसा मुख्य स्थान किसी संघ राज्यक्षेत्र में है तो अनुच्छेद द 219 और अनुच्छेद द 229 में राज्य के राज्यपाल, लोक सेवा आयोग, विधान-मंडल और संचित निधि के प्रति निर्देशों का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वे क्रमश: राष्ट्रपति, संघ लोक सेवा आयोग, संसद् और भारत की संचित निधि के प्रति निर्देश हैं ।
इसका अर्थ
ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।
यह अनुच्छेद संसद को दो या अधिक राज्यों के लिए साझा उच्च न्यायालय बनाने देता है। जहां अलग अदालतें जरूरी नहीं, वहां साझा अदालत सेवा करती है। सदस्य राज्यों के लिए राज्यपाल की भूमिकाएं साझा रूप से चलती हैं। अदालत एक है, राज्य कई।