भाग 6 · राज्य
अनुच्छेद 217 उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की और उसके पद 24क में (1)
- 3ऋ% न न न अनुच्छे द 124क आयोग की सिफारिश पर, नियक्ति की शर्तें-- राष्ट्रपति अपने और मुद्रा सहित अधिपत्र दवारा उच्च न्यायालय के प्रत्येक अनुच्छेद निर्दिष्ट राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति न्यायाधीश को नियुक्त करेगा गा और वह न्यायाधीश शूअपर या न्यायाधीश की हस्ताक्षर दशा में अनुच्छेद द 224 में उपबंधित रूप में पद धारण करेगा और किसी अन्य दशा में कार्यकारी तब तक पद धारण करेगा गा जब तक वह बासठ वर्ष की आयु प्राप्त नहीं कर लेता है: परंतु-- तु— पर्दे (क) कोई न्यायाधीश, राष्ट्रपति को संबोधित अपने सहित लेख दूवारा अपना पद त्याग सकेगा
- (ख) किसी न्यायाधीश को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने के हस्ताक्षर भ. संविधान (सातवां संशोधन) अधिनियम, 1956 की धारा 29 और अनुसूची द्वारा (1-11-1956 से) कोष्ठक और अंक “(1)” का लोप किया गया । खंड (3) का लोप किया गया । से, उस राज्य के राज्यपाल से और मुख्य न्यायमूर्ति से भिन्न किसी न्यायाधीश की की दशा में उस उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति से परामर्श करने के पश्चात ्, के स्थान पर प्रतिस्थापित । यह संशोधन सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स आन एसोसिएशन और अन्य बनाम भारत संघ ए.आई.आर. 2016 एस.सी. 117 में संविधान उच्चतम न्यायालय के तारीख 16-10-2015 के आदेश श द्वारा कर दिया गया है । तक कि वह साठ वर्ष की आयु प्राप्त न कर ले” के स्थान पर प्रतिस्थापित । संविधान 6. संविधान (पंद्रहवां संशोधन) अधिनियम, 1963 की धारा 4(क) द्वारा (5-10-1963 से) “साठ वर्ष” के स्थान पर प्रतिस्थापित । संविधान (निन््यानवेवां नियुक्ति राष्ट्रपति” रिकार्ड दूवारा अभिखंडित संविधान लिए अनच्छेद द 124 के खंड (4) मैं उपबंधित रीति से उसके पद से राष्ट्रपति दवारा हटाया जा सकेगा
- (ग) किसी न्यायाधीश का पद, राष्ट्रपति द्वारा उसे उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किए जाने पर या राष्ट्सति द्वारा उसे भारत के राज्यक्षेत्र में पति दूंवारा किसी अन्य उच्च न्यायालय को, अंतरित जाने पर रिक्त हो जाएगा ।
- (2) कोई व्यक्ति, किसी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में के लिए तभी होगा जब वह भारत का नागरिक है और— नियक्ति (क) भारत के राज्यक्षेत्र में कम से कम दस वर्ष तक न्यायिक पद धारण कर चुका है; या अर्हित (ख) किसी 1*** उच्च न्यायालय का या ऐसे दो या अधिक न्यायालयों का लगातार कम से कम दस वर्ष तक अधिवक्ता रहा है; 2*** (ग)* * * * इस खंड के प्रयोजनों के लिए:
- (क) भारत के राज्यक्षेत्र में न्यायिक पद धारण करने की अवधि की संगणना करने में वह अवधि भी की जाएगी जिसके दौरान कोई व्यक्ति न्यायिक पद धारण करने के पश्चात ् उच्च न्यायालय का अधिवक्ता रहा है या उसने किसी अधिकरण के सदस्य का पद धारण स्पष्टीकरण किया है अथवा संघ या राज्य के अधीन कोई ऐसा पद धारण किया है जिसके लिए विधि का विशेष है; (कक) किसी उच्च न्यायालय का अधिवक्ता रहने की अवधि की सम्मिलित संगणना करने में वह अवधि भी की जाएगी जिसके दौरान किसी व्यक्ति ने अधिवक्ता होने के पश्चात ् पद धारण किया है किसी या किसी अधिकरण के सदस्य का पद धारण किया है अथवा संघ या राज्य के अधीन कोई ऐसा पद धारण किया है जिसके लिए विधि का विशेष है; ज्ञान अपेक्षित (ख) भारत के राज्यक्षेत्र में न्यायिक पद धारण करने या किसी उच्च न्यायालय का अधिवक्ता रहने की अवधि की संगणना करने में इस संविधान के प्रारंभ भ से पहले की वह अवधि भी की जाएगी सम्मिलित न्यायिक भ (सातवां संशोधन) अधिनियम, 1956 की धारा 29 और अनुसूची द्वारा (1-11-1956 से) “पहली अनुसूची में किसी राज्य में के” शब्दों का लोप किया गया । ज्ञान अपेक्षित 2. संशोधन) अधिनियम, 1976 की धारा 36 द्वारा (3-1-1977 से) शब्द “या” और उपखंड (ग) अंतःस्थापित किए गए और संविधान संशोधन) अधिनियम, 1978 की धारा 28 दूवारा (20-6-1979 से) उनका लोप किया गया । सम्मिलित रूप में किया गया । हो” के स्थान पर प्रतिस्थापित । । जि (जे दि पा. संविधान विनिर्दिष्ट संविधान (बयाल्लीसवां (चवाल्लीसवां संविधान (चवालबीसवां संविधान (चवालबीसवां पुनःअक्षरांकित संविधान (बयाबीसवां यथास्थिति, क्षेत्र जिसके दौरान किसी व्यक्ति ने, ऐसे में जो 15 अगस्त, 1947 से पहले भारत शासन अधिनियम, 1935 में परिभाषित भारत में क्षेत्र समाविष्ट था, न्यायिक पद धारण किया है या वह ऐसे किसी में किसी उच्च न्यायालय का अधिवक्ता रहा है । 1 यदि (3) उच्च न्यायालय के किसी न्यायाधीश की आय के बारे में कोई प्रश्न न्यायमूर्ति उठता है तो उस प्रश्न का विनिश्चय भारत के मुख्य य तर् से परामर्श करने के राष्ट्रपति दूवारा किया पश्चात ् द्वारा जाएगा और राष्ट्रपति का विनिश्चय अंतिम होगा ।
इसका अर्थ
ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।
यह अनुच्छेद उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति संभालता है। राष्ट्रपति अधिसूचना पत्र से संवीक्षा की सिफारिश पर, उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति और राज्यपाल से परामर्श कर नियुक्ति करते हैं। न्यायाधीश वह नागरिक हो जिसने दस वर्ष न्यायिक पद पर या दस वर्ष उच्च न्यायालय में अधिवक्ता रहा हो। सेवानिवृत्ति की उम्र बासठ वर्ष है।