भाग 6 · राज्य
अनुच्छेद 224क उच्च न्यायालयों की बैठकों में सेवानिवल इस
- अध्याय में किसी बात के होते हुए भी, आयोग किसी राज्य न्यायाधीशों की नियक्ति--इस के उच्च न्यायालय के मुख्य द्वारा उसे किए गए किसी श पर, राष्ट्रपति राष्ट्रीय न्यार्सिक नियुक्ति की पूर्व सहमति से, किसी व्यक्ति से, जो उस उच्च न्यायालय या किसी अन्य उच्च न्यौयमूर्ति निर्देश न्यायालय के न्यायाधीश का पद धारण कर चुका है, उस राज्य के उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में बैठने और कार्य करने का अनुरोध कर सकेगा और प्रत्येक ऐसा व्यक्ति, जिससे इस प्रकार अनरोध किया जाता है, इस प्रकार बैठने और कार्य करने के दौरान ऐसे का हकदार होगा जो राष्ट्रपति आदेश श द्वारा अवधारित करे और उसको उस उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की सभी अधिकारिता, शक्तियां और विशेषाधिकार भत्तों होंगे, तु उसे अन्यथा उस उच्च न्यायालय का न्यायाधीश नहीं समझा जाएगा: परत तु जब तक यथापूर्वोक्त व्यक्ति उस उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में किंतु बैठने और कार्य करने की सहमति नहीं दे देता ता है तब तक इस अनुच्छेद की कोई बात उससे ऐसा करने की करने वाली नहीं समझी जाएगी भ. अपेक्षा 1. संशोधन) अधिनियम, 2014 की धारा 8 द्वारा (13-4-2015 से) “तो राष्ट्रपति सम्यक् रूप से” के स्थान पर प्रतिस्थापित । यह संशोधन सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स आन एसोसिएशन और अन्य बनाम भारत संघ ए.आई.आर. 2016 एस.सी. 117 में उच्चतम न्यायालय के तारीख 16-10-2015 के आदेश श द्वारा अभिखंडित कर दिया गया है । संविधान (निन््यानवेवां 2. (पंद्रहवां संशोधन) अधिनियम, 1963 की धारा 6 द्वारा (5-10-1963 से) “साठ वर्ष” के स्थान पर रिकार्ड प्रतिस्थापित । न्यायालय का मुख्य न्यायमूर्ति, किसी भी समय, राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से” के स्थान पर प्रतिस्थापित । यह संविधान संशोधन सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स आन एसोसिएशन और अन्य बनाम भारत संघ ए.आई.आर. 2016 एस.सी. 117 मैं उच्चतम न्यायालय के तारीख 16-10-2015 के आदेश श द्वारा अभिखंडित कर दिया गया है । संविधान संविधान (निन््यानवेवां रिकार्ड भारत का संविधान सं वधान 104 6--राज्य) विद्यमान उच्च न्यायालयों अधिकारिता-- संविधान
इसका अर्थ
ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।
यह अनुच्छेद सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को उच्च न्यायालय की पीठ पर बैठने देता है। मुख्य न्यायमूर्ति के अनुरोध पर, राष्ट्रपति की सहमति से, कोई सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय न्यायाधीश न्यायाधीश के रूप में कार्य कर सकता है। यह व्यवस्था अदालत के लंबित काम और रिक्तियां ढकती है। सेवानिवृत्त न्यायाधीश पूरी शक्तियों के साथ बैठता है।