भाग 6 · राज्य
अनुच्छेद 159 राज्यपाल दवारा शपथ या प्रत्येक राज्यपाल और प्रत्येक व्यक्ति
- जो राज्यपाल के कृत्यों का निर्वहन कर रहा है, अपना पदग्रहण करने से पहले उस राज्य के संबंध मैं अधिकारिता का प्रयोग करने वाले उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति या भत्ते उसकी में उस न्यायालय के उपलब्ध ज्येष्ठतम न्यायाधीश के प्ररूप में शपथ लेगा या करेगा गा और उस पर अपने करेगा, गा, अथार्त ्:— प्रतिज्ञान-- ईश्वर की शपथ लेता हूं “मैं, अमुक,----------------------------------------- कि मैं श्रदूधापूर्वक............... सत्यनिष्ठा से करता हूं अनपस्थिति समक्ष (राज्य का नाम) के राज्यपाल के पद का कार्यपालन (अथवा राज्यपाल के कृत्यों निम्नलिखित प्रतिज्ञान हस्ताक्षर का निर्वहन) करूंगा तथा अपनी पूरी योग्यता से संविधान और विधि का अर्थात्:-- और करूंगा और मैं.............. (राज्य का नाम) की जनता की सेवा और कल्याण मैं निरत रहूंगा ।” । प्रतिज्ञान 1. (सातवां संशोधन) अधिनियम, 1956 की धारा 7 द्वारा (1-11-1956 से) अंतःस्थापित । परिरक्षण, संरक्षण प्रतिरक्षण संविधान
इसका अर्थ
ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।
यह अनुच्छेद राज्यपाल की शपथ बताता है। हर राज्यपाल पद ग्रहण से पहले शपथ या प्रतिज्ञा लेता है। यह संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति के सामने होती है। उनकी अनुपस्थिति में उस न्यायालय का वरिष्ठतम न्यायाधीश शपथ दिलाता है। शपथ संविधान की रक्षा और संरक्षण के लिए बांधती है।