भाग 6 · राज्य

अनुच्छेद 220 स्थायी न्यायाधीश रहने के पश्चात ् पर कोई

  1. प्रतिज्ञान हस्ताक्षर व्यिक्त, इस संविधान के प्रारंभ भ के पश्चात ् उच्च न्यायालय के स्थायी विधि-व्यवसाय निर्बंधन-- न्यायाधीश के रूप में पद धारण किया है, उच्चतम न्यायालय और अन्य उच्च व्यक्ति, जिसने किसी न्यायालयों के सिवाय भारत में किसी न्यायालय या किसी प्राधिकारी के अभिवचन या कार्य नहीं करे गा । समक्ष अनुच्छे द “उच्च न्यायालय” पद के अंतर्गत संविधान (सातवां संशोधन) अधिनियम, 1956 के प्रारंभ भ 4 से पहले विद्यमान पहली अनुसूची के स्पष्टीकरण--इस अनुच्छेद मैं, विनिर्दिष्ट भाग ख में राज्य का उच्च न्यायालय नहीं है ।

इसका अर्थ

ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।

यह अनुच्छेद पुराने स्थायी न्यायाधीशों की वकालत पर रोक लगाता है। स्थायी न्यायाधीश पद छोड़ने के बाद किसी अदालत में पैरवी नहीं कर सकता। सर्वोच्च न्यायालय इसका अपवाद है। अपने से दूसरे उच्च न्यायालय में वकालत भी खुली है। यह रोक बैच को उस बार से अलग रखती है जिसका उसने न्याय किया।

Article 220 in English