भाग 5 · संघ

अनुच्छेद 100 मतदान, रिक्तियों के होते हुए भी सदनों की कार्य करने की गणपूर्ति

  1. शक्ति और
  2. (1) इस संविधान में यथा अन्यथा उपबंधित के सिवाय, प्रत्येक अध्यक्ष सदन की बैठक में या सदनों की संयुक्त बैठक में सभी प्रश्नों का अवधारण, को अध्यक्ष अथवा सभापति या के रूप में कार्य करने वाले व्यक्ति को छोड़कर, उपस्थित और मत देने ने वाले सदस्यों के बहुमत से किया जाएगा । सभापति अध्यक्ष, या अथवा उस रूप में कार्य करने वाला व्यक्ति प्रथमतः मत किन्तु निर्णायक नहीं देगा, गा, मत बराबर होने की दशा में उसका मत होगा और वह उसका प्रयोग करे गा ।
  3. (2) संसद् के किसी सदन की सदस्यता में कोई रिक्ति होने पर भी, उस सदन को कार्य करने की शक्ति होगी और यदि बाद में यह पता चलता है कि कोई व्यक्ति, जो कार्यवाहियों ऐसा करने का हकदार नहीं था, में उपस्थित रहा है या उसने मत दिया है या कार्यवाही अन्यथा भाग लिया है तो भी संसद् की कोई विधिमान्य होगी ।
  4. (3) जब तक संसद् विधि दूवारा अन्यथा उपबंध न करे तब तक संसद् के प्रत्येक गणपूर्ति यदि गणपूर्ति सदन का अधिवेशन गठित करने के लिए सदन के सदस्यों की कुल संख्या का अध्यक्ष दसवां भाग होगी । गण्पूर्ति (4) सदन के अधिवेशन में किसी समय नहीं है तो सभापति या अथवा उस रूप में कार्य करने वाले व्यक्ति का यह कर्तव्य होगा कि वह सदन निर्र्डताएं को स्थगित कर दे या अधिवेशन को तब तक के लिए निलंबित कर दे जब तक नहीं हो जाती है । लिया सदस्यों की दूसरे संसद् विधि

इसका अर्थ

ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।

यह अनुच्छेद सदनों के मतदान के नियम रखता है। कोई भी प्रश्न उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के बहुमत से तय होता है। सभापति या अध्यक्ष मत नहीं देते, मत बराबरी की दशा को छोड़कर। सदस्यता में रिक्तियां होने पर भी सदन काम कर सकता है। कोरम कुल सदस्यों का दसवां भाग है। कोरम न होने पर अध्यक्ष बैठक स्थगित करता है।

Article 100 in English