भाग 5 · संघ

अनुच्छेद 60 द्वारा शपथ या प्रत्येक राष्ट्रपति और प्रत्येक व्यक्ति,

  1. उपलब्धियों, भत्तों जो राष्ट्रपति के रूप में कार्य कर रहा है या उसके कृत्यों का निर्वहन कर रहा है, अपना निमित्त पद ग्रहण करने से पहले भारत के मुख्य न्यायमूर्ति या उसकी अनुपस्थिति में उच्चतम उपलब्धियों, भत्तों दूसरी विनिर्दिष्ट न्यायालय के उपलब्ध ज्येष्ठतम न्यायाधीश के प्ररूप में शपथ लेगा या करेगा गा और उस पर अपने करेगा, गा, अथार्त ्:— राष्ट्रपति की उपलब्धियां भत्ते या उप-राजप्रमुख” शब्दों का लोप किया गया । राष्ट्रपति दूवारा प्रतिज्ञान-- समक्ष निम्नलिखित प्रतिज्ञान हस्ताक्षर अर्थात्:-- ईश्वर की शपथ लेता हूं मैं, अमुक कि. मैं श्रदूधापूर्वक भारत के प्रतिज्ञान सत्यनिष्ठा से करता हूं राष्ट्रपति के पद का कार्यपालन (अथवा राष्ट्रपति के कृत्यों का निर्वहन) करूंगा तथा अपनी पूरी योग्यता से संविधान और विधि का और परिरक्षण, संरक्षण करूंगा और मैं भारत की जनता की सेवा और कल्याण में निरत रहूंगा ।”। प्रतिरक्षण

इसका अर्थ

ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।

यह अनुच्छेद राष्ट्रपति की शपथ बताता है। हर राष्ट्रपति, और उस पद का काम संभालने वाला हर व्यक्ति, पद संभालने से पहले शपथ या प्रतिज्ञा ले। यह भारत के मुख्य न्यायमूर्ति के सामने होती है। उनकी अनुपस्थिति में सर्वोच्च न्यायालय का वरिष्ठतम उपलब्ध न्यायाधीश शपथ दिलाता है। शपथ राष्ट्रपति को संविधान की रक्षा, संरक्षण और रक्षा के लिए बांधती है।

Article 60 in English