भाग 5 · संघ

अनुच्छेद 83 संस के सदनों की अवधि

  1. राज्य ध—
  2. (1) रा य सभा का विघटन नहीं ं होगा, किन्तु क तु उसके सदस्यों सद मैं म से यथा संभव निकटतम एक-तिहाई एक- सदस्य, तहाई सद द्वारा य, विधि संस द्वारा व ध वारा इस निमित्त न किए म त कए गए उपबंधों के अनुसार, अनु प्रत्येक सार, द्वितीय येक वर्ष की समाप्ति वष क त पर यथाशक्य यथाश य शीघ्र निवृत्त शी नवृ त हो जाएंगे ।
  3. (2) लोक सभा, यदि द पहले ही वघ टत नह ं कर दी जाती है तो, अपने थम विघटित नहीं प्रथम अ धवे शन के लिए नियत तारीख ख से थूपांच वर्ष तक बनी रहेगी, गी, इससे अ धक नह ं और अधिवेशन अधिक नहीं 2 थृपांच वर्ष पांच की उक्त क अवधि उ की समाप्ति अव ध क त का परिणाम प रणाम लोक सभा का विघटन होगा: पर तु उ त अव ध को, जब आपात की उ घोषणा वतन म है तब, संसद, व ध परन्तु उक्त अवधि उदूघोषणा प्रवर्तन में विधि वारा, ऐसी अवधि ध के लिए बढ़ा सकेगी, जो एक बार में एक वर्ष से अ धक नह ं होगी दूवारा, अधिक नहीं और उ घोषणा के वतन में न रह जाने के प चात ् उसका व तार कसी भी दशा में उदूघोषणा प्रवर्तन पश्चात् विस्तार किसी छह मास की अवधि ध से अ धक नह ं होगा । अधिक नहीं

इसका अर्थ

ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।

यह अनुच्छेद दोनों सदनों की अवधि तय करता है। राज्य सभा भंग नहीं होती। हर दूसरे वर्ष उसके लगभग एक-तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त होते हैं। लोक सभा पांच वर्ष चलती है, जब तक पहले भंग न हो जाए। आपातकाल लागू रहते संसद कानून से अवधि बढ़ा सकती है, एक बार में एक वर्ष। यह बढ़ोतरी आपातकाल खत्म होने के छह माह से आगे नहीं जा सकती।

Article 83 in English