भाग 5 · संघ

अनुच्छेद 131 उच्चतम न्यायालय की आरं इस संविधान के उपबंधों के

  1. जिन्हें अधीन रहते हुए,— अनुमोदन (क) भारत सरकार और एक या अधिक राज्यों के बीच; या (ख) एक ओर भारत सरकार और किसी राज्य या राज्यों और द ओर एक आरंभिक अधिकारिता-- या अधिक अन्य राज्यों के बीच; या --
  2. (ग) दो या अधिक राज्यों के बीच, किसी विवाद में, यदि और जहां तक उस विवाद में (विधि का या तथ्य का) ऐसा कोई प्रश्न है जिस पर किसी विधिक अधिकार का अस्तित्व या विस्तार है तो और वहां तक अन्य न्यायालयों का अपवर्जन करके उच्चतम न्यायालय को आरं दूसरी होगी: परन्तु उक्त अधिकारिता का विस्तार उस विवाद पर नहीं होगा जो किसी ऐसी संधि, करार, प्रसंविदा, वचनबंध, सनद या वैसी ही अन्य लिखत से उत्पन्न हआ है जो इस संविधान के प्रारंभ भ से पहले की गई थी या निष्पादित की गई थी और ऐसे प्रारं भ के पश्चात ् प्रवतर्न है या जो यह उपबंध करती है कि उक्त अधिकारिता का विस्तार ऐसे अंतर्वलित निर्भर विवाद पर नहीं होगा । आरंभिक 2 अधिकारिता

इसका अर्थ

ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।

यह अनुच्छेद संघीय विवादों में सर्वोच्च न्यायालय को मूल अधिकार क्षेत्र देता है। वह भारत सरकार और एक या अधिक राज्यों के बीच के विवाद सुनता है, अन्य अदालतों के बचाव में। वह राज्यों के आपसी विवाद भी सुनता है। एक पक्ष पर संघ राज्यक्षेत्र वाले विवाद भी आते हैं। कानून से दूसरे मंचों को दिए गए मामले, जैसे अंतरराज्यीय नदी जल विवाद, इससे बाहर रहते हैं।

Article 131 in English