भाग 5 · संघ

अनुच्छेद 98 संसद् का सचिवाल्रय

  1. (1) संसद् के प्रत्येक सदन का पृथक् प सचिवीय कर्मचारिवूंद होगा: परन्तु इस खंड की किसी बात का यह अर्थ नहीं लगाया जाएगा कि वह संसद् के दोनों सदनों के लिए सम्मिलित पदों के सृजन स को निवारित करती है ।
  2. (2) संसद, विधि द्वारा, संसद् के प्रत्येक सदन के सचिवीय कर्मचारिवूंद मैं भर्ती का और नियुक्त व्यक्तियों की सेवा की शर्तों का विनियमन कर सकेगी ।
  3. (3) जब तक संसद् खंड (2) के अधीन उपबंध नहीं करती है तब तक राष्ट्रपति, यथास्थिति, लोक सभा के अध्यक्ष या राज्य सभा के सभापति से परामर्श करने के पश्चात ् लोक सभा के या राज्य सभा के सचिवीय कर्मचारिवूंद भर्ती नियुक्त में के और व्यक्तियों शर्तों की सेवा की के विनियमन के लिए नियम बना सकेगा और इस प्रकार बनाए गए नियम उक्त खंड के अधीन बनाई गई किसी विधि के उपबंधों के अधीन रहते हुए प्रभावी होंगे । भारत का संविधान की कार्य संचालन प्रतिज्ञान--

इसका अर्थ

ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।

यह अनुच्छेद हर सदन को अपना सचिवालय देता है। संसद के हर सदन का अलग सचिवालयी कर्मचारी वर्ग है। दोनों सदनों के लिए साझा पद बनाए जा सकते हैं। भर्ती और सेवा शर्तों का नियमन संसद कानून से कर सकती है। तब तक राष्ट्रपति अध्यक्ष या सभापति से परामर्श कर नियम बनाता है।

Article 98 in English