भाग 5 · संघ
अनुच्छेद 124क आयोग— (1)
- आयोग नामक एक आयोग होगा, जो से मिलकर बनेगा, अथार्त ्:— समक्ष राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति 2. संशोधन) अधिनियम, 2014 की धारा 3 द्वारा (13-4-2015 से) अन्तःस्थापित । यह निम्नलिखित अर्थात्-. संशोधन सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स आन एसोसिएशन और अन्य बनाम भारत संघ ए.आई.आर. 2016 एस.सी. 117 वाले मामले में उच्चतम न्यायालय के तारीख 16-10-2015 के आदेश श द्वारा अभिखंडित कर दिया गया है । संविधान (पन््द्रहवां संविधान (निन््यानवेवां रिकार्ड (क) भारत का मुख्य न्यायमूर्ति -- अध्यक्ष, पदे पदेन न
- (ख) भारत के मुख्य न्यायमूर्ति य तर् से ठीक नीचे के उच्चतम न्यायात्रय न्यायालय के दो अन्य ज्येष्ठ न्यायाधीश— -- सदस्य, पदेन! न
- (ग) संघ का विधि और न्याय का भारसाधक मंत्री— - सदस्य, पदेन न
- (घ) प्रधान मंत्री, भारत के मुख्य न्यायमूर्ति और लोक सभा में विपक्ष के नेता या जहां ऐसा कोई विपक्ष का नेता नहीं है वहां, लोक सभा में सबसे बड़े एकत्र एकल विपक्षी दल के नेता से मिलकर बनने वात्ली समिति द्वारा नामनिर्दिष्ट किए जाने वाले दो विख्यात व्यक्ति सदस्य: परंतु विख्यात परं व्यक्तियों तु में से एक विख्यात व्यक्ति, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़े वर्ग, अल्पसंख्यक वर्ग के व्यक्तियोँ अथवा स्त्रियों मे से नामनिर्दिष्ट किया जाएगा: परंत तु यह और कि विख्यात व्यक्ति तीन वर्ष की अवधि के लिए नामनिर्दिष्ट किया जाएगा और शन का पात्र नहीं होगा । पनःनामनिर्देशन (2) आयोग का कोई कार्य या कार्यवाहियां, केवल इस आधार पर प्रश्नगत नहीं की जाएंगी या अविधिमान्य नहीं होंगी कि आयोग में कोई राष्ट्रीय न्यायिक नियक्ति रिक्ति है या उसके गठन में कोई त्रटि है ।
इसका अर्थ
ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।
यह अनुच्छेद राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग बनाता है। निन्यानवें संशोधन ने 2014 में इसे जोड़ा, ताकि वह सर्वोच्च और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों की सिफारिश करे। सर्वोच्च न्यायालय ने 2015 में इसे असंवैधानिक कहकर रद्द कर दिया। पाठ आधिकारिक संस्करण में छपा रहता है, पर आयोग कभी लागू नहीं हुआ। न्यायाधीशों की संवीक्षा समिति ही सिफारिशें करती है।