भाग 5 · संघ
अनुच्छेद 73 संघ की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार
- (1) इस संविधान के उपबंधों के मृत्यु दंडादेश अधीन रहते हुए, संघ की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार--
- (क) जिन विषयों के संबंध मैं संसद् को विधि बनाने की शक्ति है उन तक; और
- (ख) किसी संधि या करार के आधार पर भारत सरकार द्वारा प्रयोक्तव्य अधिकारों, प्राधिकार और अधिकारिता के प्रयोग तक, होगा: परंतु तु इस संविधान में या संसद् द्वारा बनाई गई किसी विधि में अभिव्यक्त रूप से यथा उपबंधित के सिवाय, उपखंड (क) में कार्यपालिका शक्ति का विस्तार किसी *** राज्य मैं ऐसे विषयों तक नहीं होगा जिनके संबंध में उस राज्य के को भी विधि बनाने की शक्ति है ।
- (2) जब तक संसद् अन्यथा उपबंध न करे तब तक इस अनुच्छेद में बात निर्दिष्ट के होते हुए भी, कोई राज्य और राज्य का कोई अधिकारी या प्राधिकारी उन विषयों में, विधान-मंडल्र जिनके संबंध में संसद् को उस राज्य के लिए विधि बनाने की शक्ति है, ऐसी कार्यपालिका शक्ति का या कृत्यों का प्रयोग कर सकेगा जिनका प्रयोग वह राज्य या उसका अधिकारी या प्राधिकारी इस संविधान के प्रारंभ भ से ठीक पहले कर सकता था । किसी शब्दों का लोप किया गया । संविधान के भाग क और भाग ख में शब्दों और का लोप किया गया । संविधान उल्लिखित” अक्षरों (भाग 5— संघ) मंत्रि-परिष्द राष्ट्रपति
इसका अर्थ
ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।
यह अनुच्छेद संघ की कार्यपालिका शक्ति की सीमा बताता है। यह उन विषयों तक फैली है जिन पर संसद कानून बना सकती है। इसमें किसी संधि या करार से मिले अधिकार भी आते हैं। इनका प्रयोग भारत सरकार करती है। संसद जब तक अन्यथा न करे, उन विषयों में राज्य अपने कार्य करते रह सकते हैं जहां संसद कानून बना सकती है। यह अनुच्छेद संघ प्रशासन की बाहरी रेखा खींचता है।