भाग 5 · संघ
अनुच्छेद 143 उच्चतम न्यायालय से परामर्श करने की राष्ट्रपति शिक्त— (1)
- देने समय राष्ट्रपति को प्रतीत होता है कि विधि या तर्थ्य का कोई ऐसा प्रश्न उत्पन्न आ है या उत्पन्न होने की संभावना है, जो ऐसी प्रकृति का और ऐसे व्यापक महत्व का ह उस पर उच्चतम न्यायालय की राय प्राप्त करना समीचीन है, तो वह उस प्रश्न शक्ति-- यदि को विचार करने के लिए उस न्यायालय को कर सकेगा और वह न्यायालय, किसी ऐसी सुनवाई के पश्चात ् जो वह ठीक समझता है, राष्ट्रपति को उस पर अपनी राय प्रतिवेदिंत कर सकेगा ।
- (2) राष्ट्रपति अनच्छेद द 131 2*** के परन्तक में किसी बात के होते हुए भी, इस प्रकार के विवाद को, जो उक्त परन्तुक में है, राय देने ने के उच्चतम निर्देशित कर_सकेगा न्यायालय को कर सकेगा और उच्चतम न्यायालय, ऐसी सुनवाई के पश्चात ् जो वह ठीक समझता है, राष्ट्रपति को उस पर अपनी राय प्रतिवेदित करे गा ।
इसका अर्थ
ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।
यह अनुच्छेद राष्ट्रपति को सर्वोच्च न्यायालय से परामर्श लेने देता है। राष्ट्रपति सार्वजनिक महत्व के किसी विधि या तथ्य के प्रश्न को न्यायालय की राय के लिए भेज सकते हैं। न्यायालय अपनी समझ के अनुसार सुनकर राय देता है। राष्ट्रपति अनुच्छेद 131 से बाहर वाले विवाद भी भेज सकते हैं। ये राय सलाहकारी होती हैं, पर बहुत वजन रखती हैं।