भाग 5 · संघ
अनुच्छेद 128 उ चतम यायालय में बैठक म की वा नवृ त यायाधीश क उपि थ त— इस
- अधिकारिता, शक्तियां विशेषाधिकार होंगे उक्त न्यायाधीश कर्तव्यों अ याय म कसी बात के होते हुए ए भी, रा य या यक नयु त आयोग, किसी भी निर्वहन समय, रा की परत क पूव सहम त से किसी यि त से, जो उ चतम यायालय या फेडरल न्यायालय के यायाधीश का पद धारण कर चुका का है या जो उ च यायालय के उच्चतम न्यायालय की बैठकों, सेवानिवृत्त न्यायाधीशों उपस्थिति-- न्यायाधीश का पद धारण कर चुका का है और उ चतम यायालय का न्यायाधीश नयु त अध्याय में किसी राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति होने के लिए स य त प से अ हत है, उ चतम यायालय के न्यायाधीश के रूप में राष्ट्रपति सहमति व्यक्ति उच्चतम न्यायालय बैठने और कार्य करने का अनु रोध कर सकेगा और येक ऐसा यि त, इस ॥ उच्च न्यायालय कार अनु रोध किया जाता है, इस कार बैठने और कार्य करने के दौरान, ऐसे भ त का उच्चतम न्यायालय नियुक्त हकदार होगा जो रा प त आदे श वारा अवधा रत करे और उसको उस न्यायालय के सम्यक्त रूप अर्हित उच्चतम न्यायालय न्यायाधीश की सभी अ धका रता, शि तयां और वशेषा धकार ह गे, क तु उसे अ यथा अनुरोध प्रत्येक व्यक्ति, जिससे. उस न्यायालय का न्यायाधीश नहीं ं समझा जाएगा: प्रकार अगुरोष प्रकार भत्तों राष्ट्रपति आदेश दवारा अवधारित अधिकारिता, शक्तियां विशेषाधिकार होंगे, किन्तु अन्यथा 1. सं वधान(न यानवेवां संशोधन) अ ध नयम, 2014 की धारा 4 द्वारा (13-4-2015 से) “भारत का मु य यायमू की रा प त क पू व सहम त से” के स्थान पर त था पत । यह संशोधन सु कोट एडवोके स आन रकाड एसो सएशन और अ य बनाम भारत संघ ए.आई.आर. 2016 एस.सी. 117 वाले मामले में उ चतम यायालय के तारीख ख 16-10-2015 के आदेश श वारा अ भखं डत कर दिया गया है । संविधान (निन्यानवेवां अधिनियम, मुख्य न्यायमूर्ति यायमू त,” के स्थान पर त था पत । यह संशोधन सु कोट एडवोके स आन रकाड एसो सएशन और अ य राष्ट्रपति पूर्व सहमति प्रतिस्थापित सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स रिकार्ड बनाम भारत संघ ए.आई.आर. 2016 एस.सी. 117 वाले मामले में उ चतम यायालय के तारीख ख 16-10-2015 के एसोसिएशन अन्य उच्चतम न्यायालय आदेश श वारा अ भखं डत कर दिया गया है । संविधान (निन््यानवेवां अधिनियम, मुख्य न्यायमूर्ति,” प्रतिस्थापित सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स रिकार्ड एसोसिएशन अन्य उच्चतम न्यायालय दूवारा अभिखंडित संविधान (पन्द्रहवां अधिनियम, अंतःस्थापित । परन्त जब तक यथापूर्वोक्त व्यक्ति उस न्यायालय के न्यायाधीश के रूप मैं बैठने और कार्य करने की सहमति नहीं दे देता ता है तब तक इस अनुच्छेद की कोई बात उससे ऐसा करने की करने वाली नहीं समझी जाएगी । अपेक्षा
इसका अर्थ
ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।
यह अनुच्छेद सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को बैच पर लौटने देता है। सर्वोच्च या उच्च न्यायालय में पद रह चुका व्यक्ति सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीश की तरह बैठ सकता है। इसके लिए राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति लेनी होती है। बैठते समय उसे न्यायालय के न्यायाधीश के सारे अधिकार क्षेत्र, शक्तियां और विशेषाधिकार मिलते हैं।