भाग 5 · संघ

अनुच्छेद 66 उपराष्ट्रपति का (1) का 1[संसद् के दोनों

  1. दूसरी विनिर्दिष्ट सदनों के सदस्यों से मिलकर बनने वाले के सदस्यों दूवारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा होगा और ऐसे में निर्वाचन-- उपराष्ट्रपति निर्वाचन मतदान गुप्त होगा । निर्वाचकगण (2) संसद् के किसी सदन का या किसी राज्य के विधान-मंडल के निर्वाचन किसी सदन का सदस्य नहीं होगा और यदि संसद् के किसी सदन का या किसी राज्य के के किसी सदन का कोई सदस्य उपराष्ट्रपति हो जाता है तो यह समझा जाएगा कि उसने उस सदन में अपना स्थान उपराष्ट्रपति के रूप में अपने पद उपराष्ट्रपति ग्रहण की तारीख से रिक्त कर दिया है ।
  2. (3) कोई व्यक्ति उपराष्ट्रपति होने का पात्र तभी होगा जब वह— विधान-मंडत्र निर्वाचित (क) भारत का नागरिक है
  3. (ख) पैंतीस वर्ष की आयु पूरी कर चुका है; और निर्वाचित समवेत संसद् के दोनों सदनों के सदस्यों” के स्थान पर प्रतिस्थापित । । (भाग 5— संघ) निर्वाचित अर्हित (ग) राज्य सभा का सदस्य होने के लिए है ।
  4. (4) कोई व्यक्ति, जो भारत सरकार के या किसी राज्य की सरकार के अधीन अथवा उक्त सरकारों में से किसी के नियंत्रण में किसी स्थानीय या अन्य प्राधिकारी के अधीन कोई लाभ का पद धारण करता है, उपराष्ट्रपति निर्वाचित होने का पात्र नहीं होगा । इस अनच् स्पष्टीकरण-- अनुच्छेद छे द के प्रयोजनों के लिए, कोई व्यक्ति केवल इस कारण कोई लाभ का पद धारण करने वाला नहीं समझा जाएगा कि वह संघ का राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति या किसी राज्य का राज्यपाल है 1*** अथवा संघ का या किसी राज्य का मंत्री है ।

इसका अर्थ

ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।

यह अनुच्छेद उपराष्ट्रपति के चुनाव से जुड़ा है। निर्वाचक मंडल में संसद के दोनों सदनों के सदस्य आते हैं। चुनाव एकल संक्रमणीय मत से समानुपातिक प्रतिनिधित्व पर, गुप्त मतदान से होता है। उपराष्ट्रपति संसद या राज्य विधान-मंडल का सदस्य नहीं रह सकता। उम्मीदवार भारत का नागरिक, कम से कम पैंतीस वर्ष का और राज्य सभा के चुनाव का योग्य हो। लाभ का पद रखने वाला योग्य नहीं है।

Article 66 in English