भाग 5 · संघ
अनुच्छेद 55 राष्ट्रपति के की रीति
- (1) जहां तक साध्य हो, राष्ट्रपति के में भिन्न-भिन्न राज्यों के प्रतिनिधित्व के मापमान में एकरूपता होगी । निर्वाचित (2) आपस में ऐसी एकरूपता तथा समस्त राज्यों और संघ में समतल्यता प्राप्त कराने के लिए संसद् और प्रत्येक राज्य की विधान सभा का प्रत्येक सदस्य निर्वाचित ऐसे मैं जितने मत देने ने का हकदार है उनकी संख्या रीति से अवधारित की जाएगी, अथार्त ्:—
- (क) किसी राज्य की विधान सभा के प्रत्येक सदस्य के उतने मत होंगे जितने कि एक हजार के णत उस भागफल में हों जो राज्य की स्पष्टीकरण-- अनच्छेद अनच्छेद दिल््ल्ली जनसंख्या को उस विधान सभा के सदस्यों की कुल संख्या से भाग देने ने पर आए; निर्वाचन निर्वाचन 1. संशोधन) अधिनियम, 1992 की धारा 2 द्वारा (1-6-1995 से) अंतःस्थापित । । * राज्यों में (नाम अधिनियम, 2006 (2006 का 44) की धारा 3 द्वारा (1-10-2006 से) अब यह पुडुचेरी है । निर्वाचित निर्वाचन निम्नलिखित अर्थात्:-- 26 निर्वाचित गणित निर्वाचित संविधान (सत्तरवां पांडिचेरी परिवर्तन)
- (ख) यदि एक हजार के उक्त गुणितों को लेने के बाद शेष पांच सौ से कम नहीं है तो उपखंड (क) मैं निर्दिष्ट प्रत्येक सदस्य के मतों की संख्या में एक और जोड़ दिया जाएगा
- (ग) संसद् के प्रत्येक सदन के प्रत्येक सदस्य के मतों की संख्या निर्वाचित वह होगी जो उपखंड (क) और उपखंड (ख) के अधीन राज्यों की विधान सभाओं के सदस्यों के लिए नियत कुल मतों की संख्या को, संसद् के दोनों सदनों के सदस्यों की कुल संख्या से भाग देने ने पर आए, आधे से अधिक निर्वाचित जिसमें भिन्न को एक गिना जाएगा और अन्य भिन्नों की की जाएगी । उपेक्षा (3) का आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल राष्ट्रपति निर्वाचन संक्रमणीय मत दूवारा होगा और ऐसे में मतदान गुप्त होगा । इस अनुच्छेद में, “जनसंख्या” पद से ऐसी अंतिम जनगणना निर्वाचन में 'स्पष्टीकरण-- पूर्ववर्ती अभिनिश्चित की गई जनसंख्या अभिप्रेत है जिसके सुसंगत आंकड़े प्रकाशित हो गए परंतु पूर्ववर्ती परं तु इस स्पष्टीकरण में अंतिम जनगणना के प्रति, जिसके सुसंगत आंकड़े निर्देश प्रकाशित हो गए हैं, श का, जब तक सन थू2026 2026 के पश्चात की गई पहली जनगणना के सुसंगत आंकड़े प्रकाशित नहीं हो जाते हैं, यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह निर्देश 1971 की जनगणना के प्रति श है । राष्ट्रपति
इसका अर्थ
ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।
यह अनुच्छेद राष्ट्रपति चुनाव का तरीका तय करता है। जहां तक संभव हो, अलग-अलग राज्यों के प्रतिनिधित्व के पैमाने में एकरूपता रहे। हर सदस्य के मत का मूल्य सूत्र से निकलता है। इससे राज्यों के समूह और संघ के बीच संतुलन बना रहता है। चुनाव एकल संक्रमणीय मत से समानुपातिक प्रतिनिधित्व पर होता है। मतदान गुप्त रहता है।