भाग 5 · संघ
अनुच्छेद 103 से संबंधित प्रश्नों पर विनिश्चय
- (1) यह निरर्हित प्रश्न उठता है कि संसद् के किसी सदन का कोई सदस्य अनुच्छेद द 102 के खंड मैं निरर्हित से ग्रस्त हो गया है या नहीं तो वह प्रश्न राष्ट्रपति को विनिश्चय के लिए जाएगा और उसका विनिश्चय अंतिम होगा भ.. सदस्यों की निरहताओं यदि वर्णित किसी निरहता 1. संशोधन) अधिनियम, 1976 की धारा 19 द्वारा (तारीख अधिसूचित नहीं की गई) इस प्रकार निर्देशित किया पढ़े जाने के लिए प्रतिस्थापित किया गया है: "(क) यदि वह भारत सरकार के या किसी राज्य सरकार के अधीन कोई ऐसा लाभ का पद धारण करता है, जिसे संसद् ने विधि द्वारा उसके धारक को घोषित किया है" । इस संशोधन का संविधान (चवालीसवां संशोधन) अधिनियम, 1978 की धारा 45 द्वारा (20-6-1979 से) लोप कर दिया गया । संविधान (बयात्लीसवां 2. संविधान (बावनवां संशोधन) अधिनियम, 1985 की धारा 3 द्वारा (1-3-1985 से) “(2) इस अनुच्छेद द के प्रयोजनों के लिए” के स्थान पर प्रतिस्थापित । । निरर्हित 3. (बावनवां संशोधन) अधिनियम, 1985 की धारा 3 द्वारा (1-3-1985 से) अंतःस्थापित । प्रतिस्थापित और तत्पश्चात ् संशोधन) अधिनियम, 1978 की धारा 14 दूवारा (20-6-1979 से) अनु ्च्छे द 103 के स्थान पर प्रतिस्थापित । । संविधान (बयाल्लीसवां अनुच्छेद संविधान (चवालबीसवां अनुच्छेद (भाग 5— संघ) निर्वाचन (2) ऐसे किसी प्रश्न पर विनिश्चय करने के पहले राष्ट्रपति आयोग की राय लेगा और ऐसी राय के अनुसार कार्य करेगा गा । प्रतिज्ञान अर्हित
इसका अर्थ
ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।
यह अनुच्छेद सदस्य की सीट पर शंका सुलझाता है। किसी सदस्य की अनुच्छेद 102 के तहत अयोग्यता का प्रश्न राष्ट्रपति के पास जाता है। राष्ट्रपति प्रश्न का निर्णय करता है। निर्णय से पहले राष्ट्रपति को निर्वाचन आयोग की राय लेनी होती है। राष्ट्रपति उसी राय के अनुसार कार्य करता है।