भाग 5 · संघ
अनुच्छेद 101 स्थानों का रिक्त होना— (1) कोई व्यक्ति संसद् के दोनों सदनों का सदस्य संविधान (बयात्नीसवां
- नहीं होगा और जो व्यक्ति दोनों सदनों का सदस्य चुन जाता है उसके एक या दस रे सदन के स्थान को रिक्त करने के लिए सं स द् द्वारा उपबंध करे गी । और खंड (4) का लोप किया गया । इस संशोधन का संविधान (चवालीसवां संशोधन) अधिनियम, 1978 की धारा 45 दूवारा (20-6-1979 से) लोप कर दिया गया ।
- (2) कोई व्यक्ति संसद् और किसी 1*** राज्य के विधान-मंडल के किसी सदन, दोनों का सदस्य नहीं होगा और यदि कोई व्यक्ति संसद् और शृकिसी राज्य के विधान- मंडल के किसी सदन, दोनों का सदस्य चुन लिया जाता है तो ऐसी अवधि की समाप्ति के पश्चात ् जो राष्ट्रपति दवारा बनाए गए नियमों” मैं विनिर्दिष्ट की जाए, संसद् मैं ऐसे व्यक्ति का स्थान रिक्त हो जाएगा यदि उसने राज्य के विधान-मंडल में अपने स्थान को पहले ही नहीं त्याग दिया है ।
- (3) यदि संसद् के किसी सदन का सदस्य–
- (क) अनुच्छेद द 102 के खंड (1) या खंड (2) में किसी से ग्रस्त हो जाता है; या वर्णित निर्रहता (ख) सभापति या को संबोधित अपने यथास्थिति, अध्यक्ष हस्ताक्षर सहित लेख द्वारा अपने स्थान का त्याग कर देता ता है और उसका त्यागपत्र, यथास्थिति, सभापति या अध्यक्ष द्वारा स्वीकार कर लिया जाता है, तो ऐसा होने पर उसका स्थान रिक्त हो जाएगा: गुपरन्तु उपखंड (ख) में त्यागपत्र की दशा में, यदि प्राप्त जानकारी से या निर्दिष्ट यथास्थिति, अन्यथा और ऐसी जांच करने के पश्चात ्, जो वह ठीक समझे, सभापति या अध्यक्ष का यह समाधान हो जाता है कि ऐसा त्यागपत्र स्वैच्छिक या असली नहीं है तो वह ऐसे त्यागपत्र को स्वीकर नहीं करेगा गा ।
- (4) यदि संसद् के किसी सदन का कोई सदस्य साठ दिन की अवधि तक सदन की अनुज्ञा के बिना उसके सभी अधिवेशनों से अनुपस्थित रहता है तो सदन उसके स्थान को रिक्त घोषित कर सकेगा: परन्तु साठ दिन की उक्त अवधि की संगणना करने में किसी ऐसी अवधि को हिसाब में नहीं लिया जाएगा जिसके दौरान सदन सत्रावसित या तर चार से अधिक निरंतर दिनों के लिए स्थगित रहता है । भ. संविधान (सातवां संशोधन) अधिनियम, 1956 की धारा 29 और अनुसूची द्वारा (1-11-1956 से) “पहली अनुसूची के भाग क या भाग ख में शब्दों और का लोप किया गया । विनिर्दिष्ट” अक्षरों राज्य” के स्थान पर प्रतिस्थापित । । ∗ मंत्रालय की अधिसूचना सं0 एफ. 46/50-सी, तारीख 26 जनवरी, 1950, भारत का राजपत्र, संविधान असाधारण, पृ0 678 में प्रकाशित समसामयिक सदस्यता प्रतिषेध नियम, 1950 । स्थान पर प्रतिस्थापित । । देखिए, विधि 4. संशोधन) अधिनियम, 1974 की धारा 2 दूवारा (19-5-1974 से) प्रतिस्थापित । । संविधान संविधान (तैंतीसवां संविधान (तैंतीसवां
इसका अर्थ
ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।
यह अनुच्छेद सदस्यता खोने के नियम रखता है। कोई व्यक्ति संसद के दोनों सदनों का सदस्य नहीं रह सकता। साथ ही संसद और राज्य विधान-मंडल दोनों का सदस्य एक साथ नहीं रह सकता। अयोग्यता, अध्यक्ष को लिखित इस्तीफे, या बिना अनुमति साठ दिन की अनुपस्थिति पर सीट खाली हो जाती है। सदन के सत्रावसान की अवधि इन साठ दिनों में नहीं गिनी जाती।