भाग 5 · संघ

अनुच्छेद 133 उच्च न्यायालयों से सिविल विषयों से संबंधित अपीलों में उच्चतम न्यायालय

  1. की अपीली अधिकारिता (1) भारत के राज्यक्षेत्र में किसी उच्च न्यायालय की सिविल कार्यवाही में दिए गए निर्णय, डिक्री या अंतिम आदेश की अपील उच्चतम क्यायालय में होगी यदि उच्च न्यायालय अनुच्छेद द 134क के अधीन प्रमाणित कर देता ख ह जी उस मामले में विधि का व्यापक महत्व का कोई सारवान ् प्रश्न है; और अंतर्वलित
  2. (ख) उच्च न्यायालय की राय में उस प्रश्न का उच्चतम न्यायालय द्वारा विनिश्चय आवश्यक है ।
  3. (2) अनुच्छेद द 132 में किसी बात के होते हुए भी, उच्चतम न्यायालय में खंड (1) के अधीन अपीलें करने वाला कोई ऐसी अपील के आधारों में यह आधार भी बता सकेगा कि इस संविधान के निर्वचन के बारे में विधि के किसी सारवान ् प्रश्न का विनिश्चय गलत किया गया है ।
  4. (3) इस अनच् में छे द बात के होते हुए भी, उच्च न्यायालय के एक पक्षकार न्यायाधीश के निर्णय, डिक्री या अंतिम आदेश की अपील उच्चतम न्यायालय में तब तक नहीं होगी जब तक संसद् विधि द्वारा अन्यथा उपबंध न करे ।

इसका अर्थ

ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।

यह अनुच्छेद दीवानी अपीलें खोलता है। दीवानी कार्यवाही में उच्च न्यायालय के निर्णय से सर्वोच्च न्यायालय में अपील होती है। उच्च न्यायालय को अनुच्छेद 134क के तहत प्रमाणपत्र देना होता है। आधार हैं, सामान्य महत्व का कोई वस्तुतः महत्वपूर्ण विधि प्रश्न, या मामला और कारण से सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय मांगता है। उच्च न्यायालय के एकल न्यायाधीश से अपील केवल तब, जब संसद उपबंध करे।

Article 133 in English