भाग 5 · संघ
अनुच्छेद 88 के बारे में मंत्रियों और महान्यायवादी के अधिकार
- प्रत्येक मंत्री और निर्दिष्ट चर्चा भारत के महान्यायवादी को यह अधिकार होगा कि वह किसी भी सदन में, सदनों की किसी संयुक्त बैठक में और संसद् की किसी समिति मैं, उसका नाम सदस्य के रूप में दिया गया है, बोले और उसकी में अन्यथा भाग ले, किन्तु इस सदनों अनुच्छेद द के आधार पर वह मत देने ने का हकदार नहीं होगा । जिसमें कार्यवाहियों 1. (पहला संशोधन) अधिनियम, 1951 की धारा 6 दूवारा (18-6-1951 से) “अनुच्छेद द 85” के स्थान पर प्रतिस्थापित । संविधान प्रतिस्थापित । इस चचार् को अग्रता देने ने के लिए” शब्दों का लोप किया गया । संविधान संविधान चर्चा संसद के अधिकारी
इसका अर्थ
ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।
यह अनुच्छेद सदनों के दरवाजे मंत्रियों और महान्यायवादी के लिए खोलता है। हर एक किसी भी सदन में बोल सकता है और कार्यवाही में भाग ले सकता है। यह अधिकार संयुक्त बैठकों और समितियों पर भी है। जो मंत्री किसी सदन का सदस्य नहीं, वह वहां मत नहीं दे सकता। इससे मंत्री दोनों सदनों में काम चला पाते हैं।