भाग 5 · संघ
अनुच्छेद 132 उच्च न्यायालयों से अपीलों में उच्चतम न्यायालय की अपीली अधिकारिता
- कछ कुछ उच्च न्यायालयों से अपीलों में उच्चतम न्यायालय की अपीली प्रारंभ अधिकारिता--
- (1) भारत के राज्यक्षेत्र में किसी उच्च न्यायालय की दांडिक या प्रवर्तन में अन्य मैं दिए गए किसी निर्णय, डिक्री या अंतिम आदेश की अपील उच्चतम न्यायालय में होगी यदि वह उच्च न्यायालय अनुच्छेद द 134क के अधीन प्रमाणित कर देता ता है कि उस मामले में इस संविधान के निर्वचन के बारे में विधि का कोई सारवान ् थू।3।क. केन्द्रीय विधियों की सांविधानिक सं से संबंधित प्रश्नों गेल प्रदनों प्रश्न है । मामलों में सिवित्ल, भ.. संविधान (सातवां संशोधन) अधिनियम, 1956 की धारा 5 द्वारा (1-11-1956 से) परन्तुक के स्थान पर कार्यवाही प्रतिस्थापित । अतर्वल्रित प्रमाणित कर दे ” के स्थान पर प्रतिस्थापित । (बयाल्लीसवां संविधान (चवाल्लीसवां (भाग 5— संघ) न 68(2)* 1 पक्षकार * * * पूर्वोक्त (3) जहां ऐसा प्रमाणपत्र दे दिया गया है 2*** वहां उस मामले में कोई इस आधार पर उच्चतम न्यायालय में अपील कर सकेगा कि किसी प्रश्न का विनिश्चय गलत किया गया है 4***। -इस अनच्छेद एल स्पष्टीकरण अनच् छे द के प्रयोजनों के लिए, “अंतिम आदेश” श” पद के अंतगर्त ऐसे अपीलार्थी पक्ष विवाद्यक का विनिश्चय करने वाला आदेश श है जो, यदि के में विनिश्चित पर्याप्त किया जाता है तो, उस मामले के अंतिम निपटारे के लिए पयार्प्त होगा ।
इसका अर्थ
ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।
यह अनुच्छेद संवैधानिक प्रश्नों पर अपील का दरवाजा खोलता है। उच्च न्यायालय के निर्णय, डिक्री या अंतिम आदेश से सर्वोच्च न्यायालय में अपील होती है। उच्च न्यायालय को अनुच्छेद 134क के तहत प्रमाणित करना होता है कि मामले में संविधान की व्याख्या का कोई वस्तुतः महत्वपूर्ण विधि प्रश्न है। फिर कोई भी पक्ष यह आधार पर अपील कर सकता है कि प्रश्न का गलत निर्णय हुआ।