भाग 5 · संघ
अनुच्छेद 92 जब सभापति या उपसभापति को पद से हटाने का कोई संकल्प विचाराधीन
- है तब उसका पीठासीन न होना—
- (1) राज्य सभा की किसी बैठक में, जब उपराष्ट्रपति को उसके पद से हटाने का कोई संकल्प विचाराधीन है तब सभापति, या जब उपसभापति को उसके पद से हटाने का कोई संकल्प विचाराधीन है तब उपसभापति, उपस्थित रहने पर भी, पीठासीन नहीं होगा और अनुच्छेद द 91 के खंड (2) के उपबंध ऐसी प्रत्येक बैठक के संबंध में वैसे ही लागू होंगे जैसे वे उस बैठक के संबंध में लागू होते हैं जिससे, यथास्थिति, सभापति या उपसभापति अनुपस्थित है ।
- (2) जब उपराष्ट्रपति को उसके पद से हटाने का कोई संकल्प राज्य सभा में विचाराधीन है तब सभापति को राज्य सभा में बोलने और उसकी कार्यवाहियों में अन्यथा भाग लेने का अधिकार होगा, किन्तु वह अनुच्छेद द 100 में किसी बात के होते हुए भी ऐसे संकल्प पर या ऐसी कार्यवाहियों के दौरान किसी अन्य विषय पर, मत देने ने का बिल्कुल हकदार नहीं होगा ।
इसका अर्थ
ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।
यह अनुच्छेद हटाने की प्रक्रिया को निष्पक्ष रखता है। सभापति को हटाने का प्रस्ताव विचाराधीन हो, तो सभापति अध्यक्षता नहीं करता। यही नियम उपसभापति पर लागू होता है। ऐसे प्रस्ताव के विचार के दौरान सभापति बोल सकता है और कार्यवाही में भाग ले सकता है। उस बैठक की अध्यक्षता किसी दूसरे सदस्य को मिलती है।