भाग 5 · संघ
अनुच्छेद 61 राष्ट्रपति पर महाभियोग चलाने की प्रक्रिया
- (1) जब संविधान के अतिक्रमण के लिए राष्ट्रपति पर महाभियोग चलाना हो, तब संसद् का कोई सदन आरोप लगाएगा ।
- (2) ऐसा कोई आरोप तब तक नहीं लगाया जाएगा जब तक (क)
- (क) ऐसा आरोप लगाने की प्रस्थापना किसी ऐसे संकल्प में नहीं है, जो कम से कम चौदह दिन की ऐसी लिखित सूचना के दिए जाने के पश्चात ् गया है जिस पर उस सदन की कुल सदस्य संख्या के कम से कम कि- एक-चौथाई सदस्यों ने करके उस संकल्प को प्रस्तावित करने का अपना आशय प्रकट किया है; और अंतर्विष्ट (ख) उस सदन की कूल सदस्य संख्या के कम से कम दो-तिहाई बहुमत दूवारा ऐसा संकल्प पारित नहीं किया गया है । प्रस्तावित किया (3) जब आरोप संसद् के किसी सदन दूवारा इस प्रकार लगाया गया है तब द हस्ताक्षर सदन उस आरोप का अन्वेषण करेगा गा या कराएगा और ऐसे अन्वेषण में उपस्थित होने का तथा अपना प्रतिनिधित्व कराने का राष्ट्रपति को अधिकार होगा ।
- (4) अन्वेषण के परिणामस्वरूप यह घोषित करने वाला संकल्प कि राष्ट्रपति के विरुदूध लगाया गया आरोप सिदूध हो गया है, आरोप का अन्वेषण करने या कराने वाले सदन की कुल सदस्य संख्या के कम से कम दो-तिहाई बहुमत द्वारा पारित कर दिया जाता है तो ऐसे संकल्प का प्रभाव उसके इस प्रकार पारित किएँ जाने की तारीख से राष्ट्रपति को दूसरा उसके पद से हटाना होगा ।
इसका अर्थ
ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।
यह अनुच्छेद राष्ट्रपति के महाभियोग की प्रक्रिया रखता है। आरोप संविधान के उल्लंघन का होता है, जो संसद का कोई भी सदन लगा सकता है। प्रस्ताव पर चौदह दिन की लिखित सूचना चाहिए, उस सदन के कम से कम चौथाई सदस्यों के हस्ताक्षरों से। उसे कुल सदस्यता के दो-तिहाई बहुमत से पारित होना चाहिए। दूसरा सदन फिर आरोप की जांच करता है, जिसमें राष्ट्रपति सामने आ सकता है और अपना पक्ष रखवा सकता है। यदि वही सदन भी उसी बहुमत से आरोप सिद्ध माने, तो राष्ट्रपति पद से हट जाता है।