भाग 5 · संघ

अनुच्छेद 116 लेखानदान, प्रत्ययानुदान और अपवादानुदान— (1) इस अध्याय के पूर्वगामी

  1. उपबंधों में किसी बात के होते हए भी, लोक सभा को—
  2. (क) किसी वित्तीय वर्ष के भाग के लिए प्राक्कलित व्यय के संबंध में कोई अनुदान, अनद उस अनुदान अनद के लिए मतदान करने के लिए अनच्छेद अनच् छे द 113 में विहित प्रक्रिया के पूरा होने तक और उस व्यय के संबंध में अनच्छेद द 114 के उपबंधों के अनसार विधि के पारित होने तक, अग्रिम देने की
  3. (ख) जब किसी सेवा की महत्ता या उसके अनिश्चित रूप के कारण मांग ऐसे ब्यौरे के साथ वर्णित नहीं की जा सकती है जो वार्षिक वित्तीय विवरण में सामान्यतया दिया जाता है तब भारत के संपत्ति स्रोतों पर अप्रत्याशित मांग की पूर्ति के लिए अनुदान करने की
  4. (ग) किसी वित्तीय वर्ष की चाल सेवा का जो अनदान भाग नहीं है, ऐसा कोई अपवादानुदान अपवादानद करने की. शक्ति होगी और जिन प्रयोजनों के लिए उक्त अनुदान किए गए हैं उनके लिए भारत की संचित निधि में से धन निकालना विधि द्वारा प्राधिकृत करने की संसद् को शक्ति होगी ।
  5. (2) खंड (1) के अधीन किए जाने वाले किसी अनदान और उस खंड के अधीन बनाई जाने वाली किसी विधि के संबंध में अनच्छेद द 113 और अनुच्छेद द 114 के उपबंध वैसे ही प्रभावी होंगे जैसे वे वार्षिक वित्तीय विवरण में वर्णित किसी व्यय के बारे में कोई अनुदान करने के संबंध में और भारत की संचित निधि में से ऐसे व्यय की पूर्ति के लिए धन का विनियोग प्राधिकृत करने के लिए बनाई जाने वाल्ली विधि के संबंध में प्रभावी हैं ।

इसका अर्थ

ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।

यह अनुच्छेद पहले से खर्च का इंतजाम करता है। पूरा बजट आने तक लोक सभा वर्ष के हिस्से के लिए अग्रिम अनुदान दे सकती है। यही वोट ऑन अकाउंट है। अत्यावश्यक अनुदान और विशेष परिस्थिति अनुदान दूसरी तत्काल जरूरतें पूरी करते हैं। अनुच्छेद 113 और 114 के नियम इन सब पर लागू होते हैं।

Article 116 in English