भाग 5 · संघ
अनुच्छेद 96 जब अध्यक्ष या उपाध्यक्ष को पद से हटाने का कोई संकल्प विचाराधीन है तब
- उसका पीठासीन न होना—
- (1) लोक सभा की किसी बैठक में, जब अध्यक्ष को उसके पद से हटाने का संकल्प विचाराधीन है तब अध्यक्ष, या जब उपाध्यक्ष को उसके पद से हटाने का कोई संकल्प विचाराधीन है तब उपाध्यक्ष, उपस्थित रहने पर भी, पीठासीन नहीं होगा और अनुच्छेद द 95 के खंड (2) के उपबंध ऐसी प्रत्येक बैठक के संबंध मैं वैसे ही लागू होंगे जैसे वे उस बैठक के संबंध में लागू होते हैं जिससे, यथास्थिति, अध्यक्ष या उपाध्यक्ष अनुपस्थित है ।
- (2) जब अध्यक्ष को उसके पद से हटाने का कोई संकल्प लोक सभा में विचाराधीन है तब उसको लोक सभा में बोलने और उसकी कार्यवाहियों में अन्यथा भाग लेने का अधिकार होगा और वह अनुच्छेद द 100 में किसी बात के होते हुए भी, ऐसे संकल्प पर या ऐसी कार्यवाहियों के दौरान किसी अन्य विषय पर प्रथमतः ही मत देने ने का हकदार होगा, किन्तु मत बराबर होने की दशा में मत देने ने का हकदार नहीं होगा । सभापति
इसका अर्थ
ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।
यह अनुच्छेद अध्यक्ष की हटाने की प्रक्रिया को निष्पक्ष रखता है। अध्यक्ष को हटाने का प्रस्ताव विचाराधीन हो, तो अध्यक्ष अध्यक्षता नहीं करता। यही नियम उपाध्यक्ष पर है। अध्यक्ष बोल सकता है और कार्यवाही में भाग ले सकता है। ऐसी कार्यवाही में अध्यक्ष केवल मत बराबरी की स्थिति में मत देता है।