भाग 5 · संघ

अनुच्छेद 82 प्रत्येक जनगणना के पश्चात ् पुनः समायोजन— प्रत्येक जनगणना की निर्वाचन-क्षेत्रों में विभाजन

  1. समाप्ति पर राज्यों को लोक सभा में स्थानों के आबंटन और प्रत्येक राज्य के प्रादे का ऐसे प्राधिकारी द्वारा और ऐसी रीति से पुनः समायोजन किया जाएगा जो संसद् विधि द्वारा अवधारित करे: परन्तु ऐसे पुनः समायोजन से लोक सभा में प्रतिनिधित्व पर तब तक कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा जब तक उस समय विद्यमान लोक सभा का विघटन नहीं हो जाता है: गुपरन्तु परन्तु यह और कि ऐसा पुनः ः समायोजन उस तारीख से प्रभावी होगा जो राष्ट्रपति विनिर्दिष्ट आदेश श द्वारा करे और ऐसे पुनः समायोजन के प्रभावी होने तक लोक सभा के निर्वाचन प्रादेशिक निर्वाचन+क्षेत्रों लिए कोई उन प्रादे के आधार पर हो सकेगा जो ऐसे पुनः समायोजन के पहले विद्यमान हैं: परन्तु यह और भी कि जब तक सन ् 2026 के पश्चात की गई पहली जनगणना के सुसंगत आंकड़े प्रकाशित नहीं हो जाते हैं तब तक इस अनुच्छेद द के अधीन,– भ. संविधान (बयाललीसवां संशोधन) अधिनियम, 1976 की धारा 15 दूवारा (3-1-1977 से) जोड़ा गया । प्रतिस्थापित । संविधान 3. (चौरासीवां संशोधन) अधिनियम, 2001 की धारा 3 द्वारा (21-2-2002 से) कुछ शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित । संविधान प्रतिस्थापित । संविधान प्रतिस्थापित । प्रतिस्थापित । संविधान (बयाल्लीसवां संविधान संविधान भारत का संविधान सं वधान 39 (भाग 5— संघ) राज्यों (i) रा य को लोक सभा में 1971 की जनगणना के आधार पर पुनः समायोजित नः स्थानों थान के आबंटन का; और प्रत्येक राज्य प्रादेशिक निर्वाचन-क्षेत्रों में विभाजन (ii) येक रा य के शक नवाचन- म वभाजन का, जो 2001 1 समायोजित किए की क जनगणना के आधार पर पुनः नः कए जाएं, आवश्यक नहीं पुनः नः समायोजन आव यक नह ं होगा ।

इसका अर्थ

ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।

यह अनुच्छेद हर जनगणना के बाद पुनर्व्यवस्था का उपबंध रखता है। लोक सभा में सीटों का बंटवारा और राज्यों के निर्वाचन क्षेत्रों की बांट कानून से दोबारा तय होती है। संसद प्राधिकारी और तरीका तय करती है। संशोधन से मौजूदा बंटवारा 1971 की जनगणना के आंकड़ों पर तब तक जमा है, जब तक 2026 के बाद की पहली जनगणना प्रकाशित न हो।

Article 82 in English