भाग 5 · संघ

अनुच्छेद 137 या आदेशों का उच्चतम न्यायालय द्वारा द्वारा

  1. बनाई गई किसी विधि के या अनच्छेद द 145 के अधीन बनाए गए नियमों के उपबंधों के अधीन रहते हुए, उच्चतम न्यायालय को अपने द्वारा सुनाए गए निर्णय या दिए गए आदेश श का पन करने की शक्ति होगी । दंडादेश निर्णयों पनर्विल्लोकन-संसद् 1. संशोधन) अधिनियम, 1978 की धारा 20 द्वारा (1-8-1979 से) अंतःस्थापित । पुर्नोर्विलोकन संविधान (चवालीसवां भारत का संविधान तय

इसका अर्थ

ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।

यह अनुच्छेद सर्वोच्च न्यायालय को अपने निर्णयों पर दोबारा विचार करने देता है। न्यायालय अपना कोई भी निर्णय या आदेश पुनर्विलोकन कर सकता है। यह शक्ति संसद के कानून और अनुच्छेद 145 के तहत नियमों के अधीन है। पुनर्विलोकन अपवाद है, रोज की दूसरी अपील नहीं।

Article 137 in English