भाग 5 · संघ

अनुच्छेद 145 न्यायालय के नियम, आदि

  1. (1) संसद् द्वारा बनाई गई किसी विधि के उपबंधों के अधीन रहते हए, उच्चतम न्यायालय समये-संमय पर, राष्ट्रपति के अनमोदन करेंगे से न्यायालय की पदंधति' और प्रक्रिया के, साधारणतया, विनियमन के लिए नियमैँ बना सकेगा जिसके अंतगर्त भी है, अथार्त ्:– विधियों (क) उस न्यायालय में विधि-व्यवसाय करने वाले के बारे मैं (तैंताबीसवां नियम; भ. उच्चतम न्यायालय (डिक्री और आदेश) श) प्रवतर्न आदे श, 1954 (सं.आ. 47) दे । संसद दवारा 2. (सातवां संशोधन) अधिनियम, 1956 की धारा 29 और अनुसूची द्वारा (1-11-1956 से) “के खंड (i)” शब्दों, कोष्ठकों और अंक का लोप किया गया । स्थान पर प्रतिस्थापित । । अंतर्गते निम्नलिखित अर्थात्:- 4. संशोधन) अधिनियम, 1976 की धारा 25 दूवारा (1-2-1977 से) अंतःस्थापित । व्यक्तियों प्रवर्तन आदेश, देखिए । संविधान संविधान संविधान (बयाबीसवां (ख) अपीलें सनने के लिए प्रक्रिया के बारे में और अपील्ों संबंधी अन्य विषयों के बारे में, जिनके अंतर्गत वह समय भी है जिसके भीतर अपीलें उस न्यायालय में ग्रहण की जानी हैं, नियम
  2. (ग) भाग 3 द्वारा अधिकारों में से किसी का प्रवर्तन कराने के लिए उस न्यायालय में के बारे में नियम प्रदत्त 1 कार्यवाहियों (गग) अनुच्छे द 139क के अधीन उस न्यायालय में के बारे (गगो अनुच्छेद कार्यवाहियों (घ) अनुच्छेद द 134 के खंड (1) के उपखंड (ग) के अधीन को ग्रहण किए जाने के बारे में नियम: अपीत्रों (ड) उस न्यायालय दूवारा सनाए गए किसी निर्णय या किए गए आदेश श का जिन के अधीन रहते हुए पन जा सकेगा उनके बारे में और ऐसे पुनर्विलोकन के लिए के बारे में, जिसके अतंर्गत वह समय भी है जिसके शौतर, ऐसे के लिए आवेदन उस न्यायालय में ग्रहण किए जाने हैं शर्तों पुर्नेर्विल्लोकन किया यम एल हुए (च) उस न्यायालय में किन्हीं. के और उनके आनषंगिक के पुनर्विल्लोकन बारे मे तथा उसमें के संबंध में प्रभारित की जाने फैसों के बारे मैं यम
  3. (छ) जमानत मंजूर करने के बारे में नियम
  4. (ज) को रोकने के बारे में नियम; कार्यवाहियों खर्चे (झ) जिस अपील के बारे मैं उस न्यायालय को यह प्रतीत होता है कि वह में, कार्यवाहियों वात्री तुच्छ या तंग करने वाली है अथवा विलंब करने के प्रयोजन से की गई है, उसके अवधारण के लिए उपबंध करने वाले नियम (ज) अनुच्छेद द 317 के खंड में के लिए प्रक्रिया के बारे में नियम । । शू*” 4*** खंड (3) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, इस अनच्छेद द के अधीन बनाए कार्यवाहियों गए नियम, उन न्यायाधीशों की न्यूनतम संख्या कर सकेंगे जो किसी प्रयोजन के लिए बैठेंगे तथा एकल न्यायाधीशों और खंड न्यायालयों की शक्ति के लिए उपबंध कर ।
  5. (3) मामले में इस संविधान के निर्वचन के बारे में विधि का कोई सारवान ् प्रश्न संक्षिप्त है उसका विनिश्चय करने के प्रयोजन के लिए या इस के अनच्छेद द 143 के अधीन की सुनवाई करने के प्रयोजन के लिए बैठने वाले न्यायाधीशों की निर्दिष्ट जांचों 5 4*** न्यूनतम संख्या पांच होगी: ए, भ. संविधान (बयालीसवां संशोधन) अधिनियम, 1976 की धारा 26 दूवारा (1-2-1977 से) अंतःस्थापित । । अनुच्छेद द 139क” के स्थान पर प्रतिस्थापित । । अब जिस स्थान पर प्रतिस्थापित । । संविधान गया । निर्देश सनवाई 5. संशोधन) अधिनियम, 1976 की धारा 26 द्वारा (1-2-1977 से) “न्यूनतम संख्या” के स्थान पर प्रतिस्थापित । संविधान (तैंतालीसवां संविधान (बयालीसवां संविधान (तैंतालीसवां संविधान (बयात्लीसवां परन्तु जहां अनुच्छेद द 132 से भिन्न इस अध्याय के उपबंधों के अधीन अपील की सुनवाई करने वाला न्यायालय पांच से कम न्यायाधीशों से मिलकर बना है और अपील की सुनवाई के दौरान उस न्यायालय का समाधान हो जाता है कि अपील में संविधान के निर्वचन के बारे में विधि का ऐसा सारवान ् प्रश्न अंतर्वलित है जिसका अवधारण अपील के निपटारे के लिए आवश्यक है वहां वह न्यायालय ऐसे प्रश्न को उस न्यायालय को, जो ऐसे प्रश्न को अंतर्वल्रित करने वाले किसी मामले के विनिश्चय के लिए इस खंड की अपेक्षानुसार गठित किया जाता है, उसकी राय के लिए निर्देशित करेगा करे गा और ऐसी राय की प्राप्ति पर उस अपील को उस राय के अनुरूप निपटाएगा । ।
  6. (4) उच्चतम न्यायालय प्रत्येक निर्णय खुले न्यायालय में ही सुनाएगा, अन्यथा नहीं और अनुच्छेद द 143 के अधीन प्रत्येक प्रतिवेदन खुले न्यायालय में सुनाई गई राय के अनुसार ही दिया जाएगा, अन्यथा नहीं । ।
  7. (5) उच्चतम न्यायालय दूवारा प्रत्येक निर्णय और ऐसी प्रत्येक राय, मामले की सुनवाई मैं उपस्थित न्यायाधीशों की बहुसंख्या की सहमति से ही दी जाएगी, अन्यथा नहीं, किन्तु इस खंड की कोई बात किसी ऐसे न्यायाधीश को, जो सहमत नहीं है, अपना विसम्मत निर्णय या राय देने ने से निवारित नहीं करे गी ।

इसका अर्थ

ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।

यह अनुच्छेद सर्वोच्च न्यायालय को अपने नियम बनाने देता है। राष्ट्रपति की अनुमति से न्यायालय अपनी कार्यप्रणाली और कार्यवाही के नियम बना सकता है। नियम किसी प्रयोजन के लिए न्यायाधीशों की न्यूनतम संख्या तय कर सकते हैं। एकल न्यायाधीशों और विभाजन पीठों की शक्तियां भी नियमों से आती हैं। संवैधानिक प्रश्नों और अनुच्छेद 143 के संदर्भों में कम से कम पांच न्यायाधीश चाहिए।

Article 145 in English