भाग 5 · संघ

अनुच्छेद 125 के वेतन, आदि

  1. (1) उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों को ऐसे वेतनों का संदाय किया जाएगा जो संसद द्वारा, करे और जब तक न्यायमूर्ति इस इस प्रकार उपबंध नहीं किया जाता है तबे तक ऐसे वेतनों का संदाय किया न्यायमूर्तियों नियक्ति विनियमित जाएगा जो द अनुसूची में हैं । विनियमों_ नियक्ति व्यक्तियों (2) प्रत्येक न्यायाधीश ऐसे विशेषाधिकारों और का तथा अनुपस्थिति छुट्टी समड़ो और पेशन के संबंध में ऐसे अधिकारों का, जो संसद् द्वारा बनाई गई विधि द्वारा या उसके अधीन समय-समय पर अवधारित किए जाएं और जब तक इस प्रकार अवधारित नहीं किए जाते हैं तब तक ऐसे विशेषाधिकारों, और अधिकारों का जो द न्यायाधीशों अनुसूची हकदार होगा: दूवारा, अवधारित निमित्त दूसरी विनिर्दिष्ट 1. (चौवनवां संशोधन) अधिनियम, 1986 की धारा 2 द्वारा (1-4-1986 से) खंड (1) के स्थान पर प्रतिस्थापित । भत्तों भत्तों दूसरी अनसूची में विनिर्दिष्ट हैं, संविधान भारत का संविधान सं वधान 60 परन्तु पर किसी तु न्यायाधीश कसी यायाधीश के विशेषाधिकारों वशेषा धकार और भत्तों भ में म तथा अनुपस्थिति अनु छुट्टी पि थ त छु या पेंशन के संबंध में उसके अधिकारों अ में धकार उसकी म नियुक्ति उसक नयु त के पश्चात् प चात ् उसके लिए अलोभकारी परिवर्तन प नहीं रवतन किया नह ं कया जाएगा ।

इसका अर्थ

ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।

यह अनुच्छेद न्यायाधीशों का वेतन देता है। सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को संसद के कानून से तय वेतन मिलते हैं। कानून बनने तक दूसरी अनुसूची तय करती है। न्यायाधीशों को संसद के कानून से तय विशेषाधिकार, भत्ते और पेंशन के अधिकार भी मिलते हैं।

Article 125 in English