भाग 5 · संघ
अनुच्छेद 134 उच्चतम न्यायालय की अपीली भारत के
- राज्यक्षेत्र में किसी उच्च न्यायालय की दांडिक में दिए गए _अनच्छेद किसी आदे श या दं डादे श अपील उच्चतम न्यायालय मैं होगी यदि--
- (क) उस उच्च न्यायालय ने अपील्र में किसी अभियुक्त व्यक्ति की दोषमुक्ति के आदेश श को उलट दिया है और उसको यु दं डादे श है; या (ख) उस उच्च न्यायालय ने अपने प्राधिकार के अधीनस्थ किसी न्यायालय से अवॉडिक विषयों में नो अधिकारिता - 8)) किसी मामले को विचारण के लिए अपने पास मंगा लिया है और ऐसे विचारण में कार्यवाही निर्णय, त व्यिक्त को सिद्धदोष ठहराया है और उसको यु दंडादे श है; या अंतिम आदेश दंडादेश की (ग) वह उच्च न्यायालय अनुच्छे द 134क के अधीन प्रमाणित कर देता ता है कि मामला उच्चतम न्यायालय मैं अपील किए जाने योग्य है: मृत्यु दंडादेश दियी भ.. संविधान (चवालीसवां संशोधन) अधिनियम, 1978 की धारा 17 द्वारा (1-8-1979 से) “यदि उच्च न्यायालय प्रमाणित करता है” खंड (2) का लोप किया. गया । _ 2. संशोधन) अधिनियम, 1978 की धारा 17 दूवारा (1-8-1979 से) कुछ शब्दों का लोप किया गया । अभियुक्त व्यक्ति मृत्यु दंडादेश दिया 3. (तीसवां संशोधन) अधिनियम, 1972 की धारा 2 द्वारा (27-2-1973 से) खंड (1) के स्थान पर प्रतिस्थापित । ग अनच्छेद 4. संशोधन) अधिनियम, 1978 की धारा 18 द्वारा (1-8-1979 से) “यदि उच्च न्यायालय प्रमाणित करे ” के स्थान पर प्रतिस्थापित । । स्थान पर प्रतिस्थापित । । संविधान (चवालीसवां संविधान संविधान (चवालबीसवां संविधान (चवालीसवां परन्त उपखंड (ग) के अधीन अपील ऐसे उपबंधों के अधीन रहते हए होगी जो अनच्छेद द 145 के खंड (1) के अधीन इस निमित्त बनाए जाएं और ऐसी शर्तों के अधीन रहते हए होगी जो उच्च न्यायालय नियत या अपेक्षित करे ।
- (2) संसद् विधि द्वारा उच्चतम न्यायालय को भारत के राज्यक्षेत्र मैं किसी उच्च न्यायालय की दांडिक में दिए गए किसी निर्णय, अंतिम आदेश श या दं डादे श कार्यवाही दंडादेश की अपील ऐसी और परिसीमाओं के अधीन रहते हए, जो ऐसी विधि में की शर्तों विनिर्दिष्ट जाएं, ग्रहण करने और सुनने की अतिरिक्त शक्ति दे सकेगी ।
इसका अर्थ
ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।
यह अनुच्छेद फौजदारी अपीलें खोलता है। फौजदारी कार्यवाही में उच्च न्यायालय के निर्णय से सर्वोच्च न्यायालय में अपील होती है। एक आधार यह है कि उच्च न्यायालय ने बरी करने को पलटकर आरोपी को मृत्युदंड दिया। प्रमाणित मामले दूसरा आधार हैं। संसद कानून से और फौजदारी अपील शक्तियां जोड़ सकती है।