भाग 5 · संघ
अनुच्छेद 127 यदि यायाधीश क नयु त— (1) य द कसी समय उ चतम यायालय के
- स को आयोजित करने या चालू रखने के लिए उस न्यायालय के यायाधीश की गणपू त तदर्थ न्यायाधीशों की नियुक्ति-- किसी उच्चतम न्यायालय त न हो तो रा य या यक नयु त आयोग भारत के मु य यायमू त वारा उसे सत्र न्यायाधीशों गणपूर्ति किए गए किसी नदश पर, रा की त क पू व सहम त से और संबं धत उ च यायालय के प्राप्त (राष्ट्रीय न्यायिक नियु क्ति मुख्य न्यायमूर्ति द्वारा मु य यायमू त से परामर्श करने के प चात ्, कसी उ च यायालय के किसी ऐसे निर्देश राष्ट्रपति पूर्व सहमति संबंधित उच्च न्यायालय न्यायाधीश से, जो उ चतम यायालय का न्यायाधीश नयु त होने के लिए स य त प मुख्य न्यायमूर्ति पश्चात्, किसी उच्च न्यायालय से अ हत है और जिसे भारत का मु य यायमू त नामो द ट करे, न्यायालय की बैठकों में उच्चतम न्यायालय नियुक्त सम्यक्त रूप उतनी अवधि ध के लिए, जितनी आव यक हो, त थ यायाधीश के रूप में उपि थत रहने के अर्हित मुख्य न्यायमूर्ति नामोदिष्ट लिए ल खत में म अनु रोध कर सकेगा । आवश्यक तर॒दर्थ न्यायाधीश उपस्थित (2) इस कार नामो द ट यायाधीश का कत य होगा कि वह अपने पद के अ य लिखित रूप अनुरोध कत य पर पू वकता देकर कर उस समय और उस अवधि ध के लिए, जिसके लिए उसकी उपि थ त अपे त है, उ चतम यायालय क बैठक म, उपि थत हो और जब वह इस प्रकार नामोदिष्ट न्यायाधीश कर्तव्य अन्य कार उपि थत होता है तब उसको उ चतम यायालय के न्यायाधीश की सभी कर्तव्यों सुविक र्विकता अ धका रता, शि तयां और वशेषा धकार ह गे और वह उ त यायाधीश के कत य का उपस्थिति उच्चतम न्यायालय की बैठकों में, उपस्थित नवहन करे गा । प्रकार उपस्थित उच्चतम न्यायालय
इसका अर्थ
ऊपर लिखे अनुच्छेद का सार। यह कानूनी सलाह नहीं है।
यह अनुच्छेद न्यायाधीशों की कमी संभालता है। सर्वोच्च न्यायालय का सत्र करने के लिए कोरम न हो, तो कोई उच्च न्यायालय का न्यायाधीश तत्कालिक न्यायाधीश बैठ सकता है। मुख्य न्यायमूर्ति के संदर्भ पर यह अनुरोध न्यायिक नियुक्ति संस्था से होता है। चुना गया न्यायाधीश प्राथमिक कर्तव्य की तरह सत्रों में आता है।